अशोक लवासा से मतभेद पर सामने आए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के आदर्श आचार संहिता की बैठकों में शामिल होने से इनकार की रिपोर्ट पर नया विवाद खड़ा हो गया है.

कहा जा रहा है कि लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर बैठकों से अलग रहने की जानकारी दी है.

मीडिया में आई रिपोर्ट्स के अनुसार लवासा ने लिखा है, “जब मेरे अल्पमत को दर्ज नहीं किया जा रहा तब आयोग में हुई बैठकों में मेरी हिस्सेदारी का कोई मतलब नहीं है.”

लवासा की चिट्ठी की ख़बरें मीडिया में आने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ने बयान जारी कर इसे गैरज़रूरी विवाद बताया है.

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा है, “आदर्श आचार संहिता को लेकर चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यशैली के बारे में आज मीडिया के एक हिस्से में अनावश्यक विवाद की ख़बरें आई हैं.”

सुनील अरोड़ा ने अपने बयान में कहा है, “चुनाव आयोग में तीनों सदस्य एक दूसरे के क्लोन नहीं हो सकते. ऐसे कई मौक़े आए हैं जब विचारों में मतभेद रहा है. ऐसा हो सकता है और होना भी चाहिए. लेकिन ये बातें चुनाव आयोग के अंदर ही रहीं. जब भी सार्वजनिक बहस की ज़रूरत हुई, मैंने निजी तौर पर उससे मुंह नहीं मोड़ा है लेकिन हर चीज़ का समय होता है.”

कांग्रेस ने इसे चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न क़रार दिया है.

समाचार एजेंसी एएनआई से कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “चुनाव आयोग मोदी जी का कठपुतली बन चुका है. अशोक लवासा जी की चिट्ठी से साफ़ है कि मोदी और अमित शाह को लेकर जो उनके विचार हैं, उन्हें भी रिकॉर्ड नहीं किया जा रहा है.”

लवासा की चिट्ठी?
मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार अशोक लवासा ने 16 मई को मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अपने पत्र में लवासा ने कहा है कि कई मामलों में उनके अल्पमत के फ़ैसले को दर्ज नहीं किया गया और लगातार इसे दबाया जाता रहा है, जो कि इस बहुसदस्यीय वैधानिक निकाय के स्थापित तौर तरीक़ों से उलट है.”
मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार, केवल अर्द्ध क़ानूनी कार्यवाहियों के दौरान लिए गए फ़ैसले या आदेश में ही अल्पमत की राय रिकॉर्ड की जाती है और आदर्श आचार संहिता की शिकायतें अर्द्ध क़ानूनी कार्यवाहियों में नहीं आती हैं, इसलिए अल्पमत की राय रिकॉर्ड करना ज़रूरी नहीं है.

नपा की अनदेखी से वाहनों का आवागमन ठप

नगर पालिका की उदासीनता से माह भर से उपनगर नरकटहा स्थित वार्ड गांधी में वाहनों का आवागमन रूका हुआ है । नरकटहा मुख्य मार्ग से गांधी नगर वार्ड को जाने वाले पिच मार्ग बने क्रास नाले क


सिद्धार्थनगर : नगर पालिका की उदासीनता से माह भर से उपनगर नरकटहा स्थित वार्ड गांधी में वाहनों का आवागमन रूका हुआ है । नरकटहा मुख्य मार्ग से गांधी नगर वार्ड को जाने वाले पिच मार्ग बने क्रास नाले का ढक्कन टूटा पड़ा है । इसमें आए दिन बच्चे व साइकिल सवार गिर कर चोटिल हो रहे पर सभासद व नपा प्रशासन को इनकी कोई परवाह नहीं है । अनदेखी से मोहल्ले के लोगों में भारी आक्रोश पनप रहा है ।
अभी बीते मंगलवार को कासिम का छह वर्षीय बेटा इसी नाले में गिर गया, जिससे उसके हाथ व मुंह पर गंभीर चोट आ गई । इसी दिन दो साइकिल सवार भी इसमें गिरकर चोटिल हो चुके है । इस मार्ग से अक्सर कार, टेंपो, रिक्सा आदि गुजरता है पर ढक्कन के टूट जाने से इनका आवागमन नहीं हो रहा है । गांधी नगर वार्ड के ही लोग जब बीमार होते हैं तो उन्हें लाद कर नरकटहा मुख्य मार्ग तक लाया जाता है। मोहल्ले के कासिम, अकबर आलम, रहमत, सुरेश, विदेश्वरी आदि का कहना है कि सभासद से कई बार कहा गया पर वह ध्यान नहीं दे रहे ।
नरकटहा मुख्यमार्ग पर नाले का निर्माण चल रहा है। ठेकेदार जो काम करवा रहा है उससे क्रास पर पत्थर ढालने के लिए कहा हूं । एक दो दिन में हम इस पर पत्थर ढलवाने का प्रयास कर रहे हैं।

गरीबों के चेहरे पर मुस्कान ला रही सरकार : पाल

सिद्धार्थनगर : केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार गरीबों के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहती है और इसी उद्देश्य के तहत कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रही है, जिसका लाभ गरीबों व जरूरतमंदों को मिल रहा है। उज्ज्वला योजना के तहत जहां गरीबों को चूल्हे की आग व धुएं से छुटकारा देने का काम किया जा रहा है, वहीं आयुष्मान भारत अंतर्गत पात्र परिवार को पांच लाख रुपये तक स्वास्थ्य बीमा का फायदा पहुंचाया जा रहा है।

ये बातें सांसद जगदम्बिका पाल ने कहीं। वह रविवार को खजुवा, कटया व महुआरा में उज्ज्वला योजना के तहत आयोजित मुफ्त रसोई गैस वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि खजुवा में 83, कटया व महुआरा में 90-90 लाभार्थियों को रसोई गैस दी जानी है। इसके बाद भी जो पात्र छूटे हैं, उनको भी योजना का लाभ दिया जाएगा। प्रधानमंत्री योजना के तहत सभी गरीबों को आवास देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। थोड़ा इंतजार करें, कोई गरीब ऐसा नहीं बचेगा, जिसके पास खुद का मकान न हो। संबोधन के दौरान सांसद ने केंद्र व प्रदेश सरकार तमाम योजनाओं पर बृहद रूप से प्रकाश डाला। पूर्व जिपं अध्यक्ष साधना चौधरी, भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मोनी पाण्डेय, मंडल अध्यक्ष गौरव मिश्रा ने आदि ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

राम नारायण, पूरन यादव, कसीम रिजवी, राजू पाल, राम प्रकाश गौतम कमलेश चौरसिया, शैलिनी यादव, अवधेश चौधरी, घनपाल, अयोध्या प्रसाद, विजय बहादुर, प्रकाश ¨सह, कुसुम, शैलेश ¨सह, कौलेश्वर समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

EC की क्लीन चिट पर आयोग में ही मतभेद, आयुक्त लवासा और CEC आमने-सामने

सूत्र बताते हैं कि चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखे पत्र में यह बात भी कही है कि उनकी मांग के अनुरूप व्यवस्था नहीं बनने तक वह बैठक में ही शामिल नहीं होंगे. कई विवादित फैसले लेने के कारण चुनाव आयोग निशाने पर है.

लोकसभा चुनाव के खत्म होते-होते चुनाव आयोग में भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. आयोग के आचार संहिता तोड़ने संबंधी कई फैसलों पर असहमति जताने वाले चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को पत्र लिखकर मांग की है कि आयोग के फैसलों में आयुक्तों के बीच मतभेद को भी आधिकारिक रिकॉर्ड पर शामिल किया जाए.

अशोक लवासा देश के अगले मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की कतार में हैं और सूत्रों के मुताबिक लवासा आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को सीधे-सीधे लगातार क्लीन चिट और विरोधी दलों के नेताओं को नोटिस थमाए जाने के खिलाफ रहे हैं.

चुनाव आयोग में फैसले को लेकर हो रहे विवाद और लवासा की ओर से पत्र लिखे जाने को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा, ‘चुनाव आयोग में 3 सदस्य होते हैं और तीनों एक-दूसरे के क्लोन नहीं हो सकते. मैं किसी भी तरह के बहस से नहीं भागता. हर चीज का वक्त होता है.’

चुनाव आयोग मोदी का पिट्ठूः कांग्रेस

दूसरी ओर, इस विवाद पर कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग मोदी का पिट्ठू बना चुना है, अशोक लवासा की चिट्ठी से साफ है कि सीईसी और उनके सहयोगी लवासा के बीच नरेंद्र मोदी और अमित शाह को लेकर जो अलग मत है, उसे रिकॉर्ड करने को तैयार नहीं हैं.

इससे पहले सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग की बैठक में अपने अलग मत की वजह से सुर्खियों में रहे अशोक लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखी चिट्ठी में कहा है कि 3 सदस्यीय आयोग में एक सदस्य का भी विचार भिन्न हो तो उसे आदेश में बाकायदा लिखा जाए. लवासा चुनाव आयोग में सुप्रीम कोर्ट जैसी व्यवस्था चाहते हैं. जिस तरह से कोर्ट की खंडपीठ या विशेष पीठ में किसी केस की सुनवाई के बाद फैसला सुनाते वक्त अगर किसी जज का फैसला सहमति से लिए गए फैसले के उलट रहता है तो भी  उसका फैसला रिकॉर्ड किया जाता है.

फैसला होने तक बैठक में नहीं

सूत्रों ने यह भी बताया कि अशोक लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखे पत्र में यह बात भी कही है कि उनकी मांग के अनुरूप व्यवस्था नहीं बनने तक वह बैठक में ही शामिल नहीं होंगे.

हालांकि, चुनाव आयोग की नियमावली के मुताबिक तीनों आयुक्तों के अधिकार क्षेत्र और शक्तियां बराबर हैं. किसी भी मुद्दे पर विचार में मतभेद होने पर बहुमत का फैसला ही मान्य होगा. फिर चाहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ही अल्पमत में क्यों ना हों.

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट भी चुनाव आयोग को अपने अधिकारों का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किए जाने पर डांट चुका है. आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से आयोग में दाखिल शिकायतों का जल्द निपटारा नहीं किए जाने की आलोचना भी की. चुनाव आयोग नरेंद्र मोदी और अमित शाह को कई मामलों में क्लीन चिट दे चुका है. जबकि इन दोनों नेताओं के खिलाफ अपने चुनावी भाषणों में सेना की सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिक जिक्र और विरोधियों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे.

रिकॉर्ड रखने का आदेश

मोदी-शाह क्लीन चिट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आयोग के आदेशों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा है. इस आदेश के बाद आयोग को अंदेशा है कि अगली सुनवाई में कोर्ट आयोग में होने वाली मीटिंग की प्रक्रिया और फैसले के आधार को लेकर तीखे और सीधे सवाल करेगा.

जारी लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष खुलकर आयोग पर आरोप लगा रहा है कि वह निष्पक्ष रूप से फैसले नहीं ले रहा. बंगाल में अमित शाह के रोड शो में हुई हिंसा के बाद बुधवार को चुनाव आयोग के तय समय से 20 घंटे पहले ही चुनाव प्रचार को रोक दिए जाने की भी तीखी आलोचना हुई थी.

इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि चुनाव आयोग मोदी और शाह के इशारे पर काम कर रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी भी ऐसे ही आरोप लगाती रही है.

https://aajtak.intoday.in/video/election-commission-campaign-ban-mamata-banerjee-angry-amit-shah-pm-modi-1-1084141.html?jwsource=cl

इस बार वर्ल्ड कप में ये सॉन्ग मचाएगा धूम, ICC ने रिलीज किया VIDEO

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने सभी स्ट्रीमिंग मंचों पर पुरुष वनडे वर्ल्ड कप का आधिकारिक गान ‘स्टैंड बाई’ जारी किया. यह सॉन्ग 30 मई से शुरू होने वाले टूर्नामेंट के दौरान मैदानों और शहर में इससे संबंधित होने वाले कार्यक्रमों में बजाया जाएगा.
आईसीसी पुरुष वर्ल्ड कप दुनिया की बड़ी वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं में से एक है, जिसमें 10 लाख खेल प्रशंसक एकजुट होंगे और अरबों प्रशसंक 48 मैचों को टीवी पर देखेंगे.
वर्ल्ड कप- 2019 में टीम इंडिया का शेड्यूल
25 मई: (वॉर्म-अप) भारत बनाम न्यूजीलैंड, ओवल
28 मई: (वॉर्म-अप) भारत बनाम बांग्लादेश, कार्डिफ
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1. भारत बनाम साउथ अफ्रीका, साउथेम्प्टन – 5 जून
2. भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, द ओवल – 9 जून
3. भारत बनाम न्यूजीलैंड, ट्रेंट ब्रिज – 13 जून
4. भारत बनाम पाकिस्तान, ओल्ड ट्रैफर्ड – 16 जून
5. भारत बनाम अफगानिस्तान, साउथेम्प्टन – 22 जून
6. भारत बनाम वेस्टइंडीज, ओल्ड ट्रैफर्ड – 27 जून
7. भारत बनाम इंग्लैंड, एजबेस्टन – 30 जून
8. भारत बनाम बांग्लादेश, एजबेस्टन – 2 जुलाई
9. भारत बनाम श्रीलंका, लीड्स – 6 जुलाई
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9 जुलाई: सेमीफाइनल 1, ओल्ड ट्रैफर्ड
11 जुलाई: सेमी-फाइनल 2, एजबेस्टन
14 जुलाई: फाइनल, लॉर्ड्स

लोकसभा चुनाव 2019 : एग्ज़िट पोल पर चुनाव आयोग का विरोधाभासी रवैया




सातवें और अंतिम चरण का मतदान रविवार, 19 मई को होने जा रहा है… (प्रतीकात्मक फोटो)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि छठे चरण के मतदान के बाद ही BJP को पूर्ण बहुमत की सीटें हासिल हो गईं और आखिरी मतदान के बाद उनकी पार्टी 300 सीटों का आंकड़ा पार कर लेगी. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 ए के तहत चुनावी अधिसूचना जारी होने के बाद एग्ज़िट पोल या अन्य तरीके से परिणामों के पूर्वानुमान के प्रकाशन या प्रसारण पर प्रतिबंध है. इसका उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ-साथ दो साल की सज़ा का भी प्रावधान है. अंग्रेज़ी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की ख़बर के अनुसार चुनाव आयोग ने तीन मीडिया हाउसों को ऐसे ही नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा है. ख़बरों के अनुसार ट्विटर में भी एग्ज़िट पोल से जुड़े एक ट्वीट को हटाया गया है. वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान पहले दौर की वोटिंग के बाद रिज़ल्ट के पूर्वानुमान प्रकाशित करने के लिए चुनाव आयोग ने हिन्दी दैनिक ‘दैनिक जागरण’ के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था. सोशल मीडिया के डिजिटल दौर में परंपरागत मीडिया पर सख्ती और राजनेताओं पर ढील से कई सवाल खड़े हो गए हैं.
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हेतु चुनाव आयोग के पास वैधानिक अधिकार : स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को संवैधानिक अधिकार मिले हैं. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के तीन महत्वपूर्ण पहलू हैं –
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में खर्च करने की सीमा, जिससे चुनाव में धनबल के प्रयोग को रोका जा सके, इसके लिए विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति.
आपराधिक छवि या पृष्ठभूमि के लोगों को चुनाव लड़ने से हतोत्साहित करने के लिए अनेक नियम, शपथपत्र और चुनावी आचार संहिता.
लोकतांत्रिक देश में स्वस्थ और निष्पक्ष तरीके से जनता मतदान कर सके, इसके लिए चुनाव के आखिरी 48 घंटे में सभी प्रकार के प्रचार पर रोक.



इस बार के चुनाव में कुल 60,000 करोड़ रुपये के खर्च का आकलन यदि सही है, तो इसका मतलब यह है कि खर्च और आपराधिकता के पहलुओं को नियंत्रित करने में चुनाव आयोग पूरी तरह विफल रहा है.
एग्ज़िट पोल पर प्रतिबंध हेतु कानून : संसद द्वारा सन 1951 में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम पारित किए जाने के अलावा इस बारे में 1961 में विस्तृत चुनावी नियम भी बनाए गए. एग्ज़िट पोल के प्रकाशन और प्रसारण पर इसलिए प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि मतदान की निष्पक्षता को प्रभावित नहीं किया जा सके. इस बार एग्ज़िट पोल पर प्रतिबंध के लिए चुनाव आयोग ने 7 अप्रैल को नया नोटिफिकेशन जारी किया, जिसके अनुसार एग्ज़िट पोल पर 11 अप्रैल की सुबह से लेकर 19 मई की शाम 6:30 बजे तक प्रतिबंध रहेगा. इस आदेश से यह ज़ाहिर है कि 11 अप्रैल से पहले और 19 मई के बाद प्रकाशित समाचारों पर मीडिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती.
एग्ज़िट पोल के साथ ज्योतिष, टैरो कार्ड और चुनावी आकलन पर भी प्रतिबंध : आरपी एक्ट की धारा 126 के तहत एग्ज़िट पोल, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया और प्रसारण को कानूनी तौर पर परिभाषित किया गया है. इसके अनुसार एग्ज़िट पोल में मतदाताओं द्वारा मतदान के पैटर्न का आकलन कर चुनावी परिणाम का सर्वे किया जाता है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने चुनाव आयोग की प्रवक्ता से बातचीत के बाद जो समाचार प्रकाशित किया है, उसके अनुसार एग्ज़िट पोल के दायरे का इस बार विस्तार किया गया है. इसके अनुसार एग्ज़िट पोल के साथ अब ज्योतिष, टैरो कार्ड और चुनावी आकलन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है.
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और चुनावी आचार संहिता : वित्तमंत्री और वरिष्ठ न्यायविद अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग के माध्यम से कहा है कि चुनावी आचार संहिता से राजनेताओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जा सकता. संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मीडिया को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के अनेक आदेशों से मान्यता भी मिली है. सभी दलों के नेताओं ने चुनावी प्रचार और भाषणों से कानून और आचार संहिता की सभी सीमाओं को तोड़ दिया और चुनाव आयोग लाचार है. एग्ज़िट पोल को कानून में परिभाषित किया गया है, तो फिर उसके दायरे में चुनावी आकलन या ज्योतिषीय गणना को बेवजह क्यों शामिल किया जा रहा है…? वरिष्ठ नेताओं द्वारा इंटरव्यू में सीटों के जीतने और हारने का विस्तृत विश्लेषण दिया जा रहा है, तो फिर पत्रकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों को उनके विश्लेषण के अधिकार से कैसे वंचित किया जा सकता है…?
चुनाव आयोग का अतिरेक, असंतुलन और अप्रासंगिकता : मुक्त अर्थव्यवस्था के पूंजीवादी दौर में डिजिटल क्रांति आ गई, लेकिन चुनाव आयोग अब भी लकीर का फ़कीर बना हुआ है. पार्टियों द्वारा TV चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से सभी नियमों को धता बताकर मतदान केंद्रों तक वोटरों को प्रभावित किया जा रहा है और चुनाव आयोग लाचार है. हाईटेक रोड शो और चार्टर्ड फ्लाइट्स के न्यू इंडिया में टूटते नियमों के दौर में चुनाव आयोग अब भी शादियों में चाय-पानी के खर्च की मुनीमी करने में जुटा है. सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले से खुलासा हुआ कि पिछले आम चुनाव में ज़ब्त अधिकांश नगदी को चुनाव आयोग ने वापस कर दिया है. चुनाव आयोग ने पिछले आम चुनाव से पहले सोशल मीडिया हेतु अक्टूबर, 2013 में नियमावली बनाई थी, जिसका इस बार के चुनाव में भी पालन नहीं हो रहा. सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद चुनाव आयोग ने इस बार सरगर्मी जताई. इस मंथर प्रवृति को देखते हुए सोशल मीडिया में केंद्रीय चुनाव आयोग को ‘केंचुआ’ की संज्ञा दे दी गई.
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार को एक दिन पहले बंद करने के लिए चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत विशेष अधिकारों का इस्तेमाल किया है. उसी तर्ज़ पर आयोग द्वारा यदि सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती बरतने के साथ-साथ राजनीतिक दलों के साइबर वार रूम में छापेमारी की जाए, तो चुनावी प्रक्रिया काफी हद तक दुरुस्त हो सकती है. पार्टियों के बड़े खर्चे, नेताओं की बद्जुबानी, पेड न्यूज़ और आचार संहिता के संगठित उल्लंघन को रोकने में विफल चुनाव आयोग द्वारा, राजनीतिक विश्लेषण को रोकने का अतिरेकी प्रयास, आयोग की प्रभुसत्ता को और भी अप्रासंगिक बना देगा.

डुमरियागंज- लोकसभा चुनाव

नेपाल राष्ट्र से सीमा साझा करने वाली यह संसदीय सीट जनपद सिद्धार्थनगर को कवर करती है। भाजपा के जगदंबिका पाल यहां से वर्तमान सांसद हैं। तथागत बुद्ध का क्रीड़ास्थल कपिलवस्‍तु भी यहीं है। इस क्षेत्र का सिद्धार्थनगर ‘काला नमक’ चावल के लिए दुनिया भर में काफी मशहूर है। आयरन और जिंक से भरपूर इन चावलों का ज़िक्र संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि सम्बन्धी संस्था ने अपनी किताब ‘स्पेसिअलिटी राइस ऑफ वर्ल्ड’ में भी किया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ की आज सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और डुमरियागंज में चुनावी सभा


लखनऊ, जेएनएन। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ही स्टार प्रचारक की भूमिका में आ चुके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज सिद्धार्थनगर के साथ संतकबीर नगर, डुमरियागंज और गोरखपुर में चुनावी सभा करेंगे। उनकी कर्मस्थली गोरखपुर के आसपास के जिलों में सीएम योगी आदित्यनाथ का खासा प्रभाव है, जो भाजपा के प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बना देगा।
मुख्यमंत्री दिन सिद्धार्थनगर जिले के खेसरहा में संतकबीरनगर से भाजपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद और डुमरियागंज से भाजपा प्रत्याशी जगदंबिका पाल के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे। दोपहर 12 बजे वह पिपराइच, 3.30 पर कैंपियरगंज और शाम पांच बजे अभयनंदन इंटर कालेज (गोरखपुर) में भाजपा प्रत्याशी रवि किशन के समर्थन में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। 
इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी देवरिया और बलिया में होंगे। गडकरी दोपहर बाद तीन बजे पथरदेवा स्थित आचार्य नरेंद्रदेव इंटर कालेज के मैदान देवरिया से भाजपा प्रत्याशी डॉ. रमापति राम त्रिपाठी के समर्थन में जनसभा करेंगे। शाम 4.30 बजे हल्दी (बलिया) में वहां के पार्टी प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह मस्त के समर्थन में जनसभा करेंगे।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सलेमपुर, घोसी और वाराणसी में होंगीं। वह दोपहर बाद 2.30 बजे बिल्थरा रोड स्थित जीएम इंटर कालेज के मैदान में सलेमपुर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी रवींद्र कुशवाहा के समर्थन में, शाम चार बजे डीसीएसके इंटर कालेज मऊ के पास घोसी लोकसभा से भाजपा प्रत्याशी हरिनारायण राजभर और शाम सात बजे बजे वाराणसी के रामनगर चौक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में जनसभा करेंगीं।
रीता के लिए वोट मांगेंगे केशव मौर्य
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इलाहाबाद लोकसभा से भाजपा प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी केसमर्थन में दोपहर बाद 2.30 बजे रामलीला मैदानए गरईया जारी बाजार के रामलीला मैदान में जनसभा करेंगे। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और साध्वी निरंजन ज्योति मछलीशहर, जौनपुर, संतकबीरनगर और चंदौली में, केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला संतकबीरनगर में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे।