बिहार में चमकी बुखार से मासूमों की मौत का आकड़ा 142 पर पहुंच गया है. यह
आंकड़ा इतने पर ही थमने को तैयार नहीं है, लगातार चमकी बुखाकर से पीड़ित
बच्चे अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं. बिहार में मचे इस अकाल पर जब वहां के
CM नीतीश कुमार से जवाब मांगा गया तो वह मीडिया पर ही भड़क गए. इससे पहले
भी नीतीश से जब दिल्ली में बच्चों की मौत पर सवाल किया गाय तो वे तब भी चुप
ही थे.
पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयर स्ट्राइक की थी और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर बमबारी की थी. भारतीय वायुसेना ने इस एयर स्ट्राइक को बेहद गोपनीय रखा था और इसकी गोपनीयता को बनाए रखने के लिए इसका कोडनेम दिया था-ऑपरेशन बंदर.
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए
आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयर
स्ट्राइक की थी. भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आतंकी संगठन
जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया था और इस ऑपरेशन का कोडनेम दिया
था- ऑपरेशन बंदर.
माना जा रहा है कि हनुमान के नाम पर इस ऑपरेशन का नाम
बंदर रखा गया था. जिस तरह हनुमान ने रावण की लंका में घुसकर लंकादहन किया
था, वैसे ही भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों पर बम
फोड़े थे. रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस साल फरवरी में जैश-ए-मोहम्मद के
ठिकानों पर बेहद गोपनीय तरीके से एयर स्ट्राइक की गई थी. इस ऑपरेशन की
गोपनीयता को बनाए रखने के लिए भारतीय वायुसेना ने इसका कोडनेम ऑपरेशन बंदर
दिया था.
ऑपरेशन बंदर इतना गोपनीय रखा गया था कि पाकिस्तान को उस
समय तक इसकी भनक नहीं लगी, जब तक की भारतीय वायुसेना के मिराज विमान अपने
मिशन को अंजाम देकर भारतीय क्षेत्र में वापस नहीं लौट आए. जब पाकिस्तान को
इसकी जानकारी लगी, तो वह बौखला गया था. इसके बाद पाकिस्तान ने भारतीय
क्षेत्र में हवाई हमला किया था, जिसका भारतीय वायुसेना ने भी मुंहतोड़ जवाब
दिया था.
इस हवाई भिड़ंत में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के
एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था. इस दौरान भारतीय वायुसेना का विमान
मिग-21 हादसे का शिकार हो गया था और इसको उड़ा रहे पायलट विंग कमांडर
अभिनंदन पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में पहुंच गए थे. वहां उन पर
पाकिस्तानियों ने हमला कर दिया था और फिर पाकिस्तानी सेना ने उन्हें पकड़
लिया था. हालांकि भारत के दवाब के आगे पाकिस्तान को झुकना पड़ा था और
भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा करना पड़ा था.
गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी संसद के
संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए बालाकोट एयरस्ट्राइक का जिक्र किया था.
उन्होंने कहा था कि भारत ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक और फिर पुलवामा आतंकी
हमले के बाद एयर स्ट्राइक करके अपने इरादे और क्षमता का परिचय दिया है. साथ
ही राष्ट्रपति ने यह कहा था कि भविष्य में भी देश की सुरक्षा सुनिश्चित
करने के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएंगे.
आपको बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गए थे. इस आतंकी हमले के बाद ही भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी. भारतीय वायुसेना की इस कार्रवाई में 250 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की बात कही जा रही है. इन घटनाओं के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भी काफी देखने को मिला.
नरेंद्र मोदी की चुप्पी भी एक ख़ास तरह से गूंजती है, जैसे कि उनके भाषण.
दरअसल,
लगातार सक्रिय और मुखर रहने वाले लोगों की चुप्पी पर अक्सर ध्यान चला जाता
है. जो नेता जनता से लगातार संवाद कर रहा हो, लेकिन एक ख़ास बड़े मुद्दे
पर चुप हो तो ये ख़याल आना लाजिमी है कि आख़िर इसकी वजह क्या है.
पीएम
के तौर पर अपने पिछले कार्यकाल के अंत में वे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के
साथ अपनी पहली प्रेस कॉन्फ़्रेंस में नज़र आए, लेकिन सुनाई नहीं दिए. सुनाई
दी उनकी गूंजती हुई चुप्पी.
प्रेस कॉन्फ़्रेंसों और सवालों के जवाब
देने से परहेज़ करने की पीएम मोदी की नीति के पीछे उनकी सोच चाहे जो भी हो,
लेकिन एकतरफ़ा संवाद उन्हें ख़ास पसंद हैं, इसके माध्यम के तौर पर
प्रधानमंत्री को ट्विटर विशेष प्रिय है. शपथ लेने के बाद @narendramodi ने
कुल 134 ट्वीट किए हैं जिनमें मुज़्फ़्फ़रपुर के बच्चों की बारी नहीं आ पाई
है.
गाय के नाम पर होने वाली हत्याओं, राफ़ेल, लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं और गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत जैसे अनेक मामलों में पूरे पांच साल तक लोगों ने नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल पर नज़र रखी और उन्हें निराशा ही हाथ लगी.
ऐसा नहीं है कि नरेंद्र मोदी ने इन मुद्दों पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने तब कहा जब उनका जी चाहा, उस वक़्त बिल्कुल नहीं, जब लोग चाहते हों कि वे कुछ कहें. बड़े राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय ज़ाहिर करने का समय ख़ुद चुनकर, प्रेस कॉन्फ़्रेंस न करके या सवालों के जवाब न देकर वे क्या जताना चाहते हैं?
वे शायद यही जताना चाहते हैं कि वे किसी के दबाव में नहीं हैं, वे किसी
और की नहीं, अपनी मर्ज़ी से चलते हैं, और उनसे मांगकर कोई जवाब नहीं ले
सकता. वे परिस्थितियों के अधीन काम नहीं करते बल्कि अपनी राजनीति के अनुरूप
परिस्थितियां खुद बनाते हैं.
इसे आप राजनीतिक चतुराई समझें, उनका
अहंकार समझें या अपने विरोधियों को बेमानी बनाने की कोशिश, यह आपकी मर्ज़ी
है. यह तो हम-आप सुनते ही रहे हैं कि प्रधानमंत्री से हर मामले पर लगातार
बोलते रहने की उम्मीद करना ग़लत है.
अब सवाल ये है कि ‘हर मामला’ क्या है, और ‘ख़ास मामला’ क्या है. इसके लिए नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल को ज़रा ग़ौर से देखना होगा.
मुज़फ़्फ़रपुर के बच्चों की मौत
बिहार में जहां भारतीय जनता पार्टी सत्ता में साझीदार है, जहां राज्य के
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे बीजेपी के नेता हैं, वहां इतनी बड़ी संख्या
में बच्चों की लगातार मौत की ख़बरें पिछले 20 दिनों से आ रही हैं.
मीडिया
ने देर से ही सही, हंगामाखेज़ रिपोर्टिंग शुरू की है यानी मामला राष्ट्रीय
सुर्खियों में है. मीडिया कवरेज के बारे में चर्चा करना यहां मकसद नहीं है
लेकिन ज़्यादातर चैनल यही बताने की कोशिश कर रहे हैं कि डॉक्टर बच्चों का
इलाज ठीक से नहीं कर रहे हैं, लीची से लेकर जापान तक की बातें हो रही हैं
लेकिन देश की सरकार की ज़िम्मेदारी की नहीं.
बहरहाल, 30 मई को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तकरीबन इसी समय से बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले से बच्चों की मौत की खबरें आनी शुरू हुई थीं, जब 20 से ज़्यादा दिन गुज़र चुके हैं, राज्य में 150 से अधिक बच्चे मौत की नींद सो चुके हैं. डॉक्टर इस बात पर आम राय रखते हैं कि इस बीमारी का सही तरीके से इलाज होने पर जानें बच सकती थीं यानी मेडिकल चूक नहीं, प्रशासनिक और व्यवस्थागत नाकामी है.
Dear @SDhawan25, no doubt the pitch will miss you but I hope you recover at the earliest so that you can once again be back on the field and contribute to more wins for the nation. https://t.co/SNFccgeXAo
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी
चौबे ने पटना में पत्रकारों के सवाल के जवाब ज़रूर दिए हालांकि उस प्रेस
कॉन्फ़्रेंस की ज़्यादा चर्चा केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री की झपकियों
की वजह से रही. मामले के बहुत बढ़ जाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश
कुमार ने अस्पतालों का दौरा ज़रूर किया लेकिन बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार
कौन है? इसका कोई जवाब न तो केंद्र सरकार के पास है, न राज्य सरकार के पास.
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बीस दिनों के बाद कहा है कि वे लोगों के दुख-दर्द को समझती हैं क्योंकि उनके भी बच्चे हैं.
प्रशासन और व्यवस्था के लिए कौन ज़िम्मेदार है? इसका जवाब मीडिया डॉक्टरों से मांग रहा है. इसी मामले पर चल रही बैठक में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके मंगल पांडे की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जाता है कि वे बीच बैठक में वे पूछ रहे थे कि “कितने विकेट गिरे?”
क्रिकेट की चिंता केवल बिहार के स्वास्थ्य मंत्री को ही नहीं है,
नरेंद्र मोदी की चुप्पी की ख़ास तौर से तब चर्चा में आई जब उन्होंने भारत
के सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन के टूटे अंगूठे पर कुछ इस तरह की भावना ज़ाहिर
की, “शिखर, बेशक पिच पर आपकी कमी खलेगी, लेकिन मैं उम्मीद करता हूँ कि आप
जल्द-से-जल्द ठीक हो जाएं और मैदान पर लौटकर देश की जीत में और योगदान करे
सकें.”
इसके अलावा, अपने दूसरा कार्यकाल शुरू करने के बाद से
नरेंद्र मोदी अनेक ट्वीट कर चुके हैं. उन पर एक नज़र डालना काफ़ी दिलचस्प
होगा. कुल 134 ट्वीट में से 32 तो सिर्फ़ अलग-अलग योगासनों के बारे में हैं
या फिर दुनिया भर में योग की लोकप्रियता पर हर्ष और गर्व दिखाने के लिए.
बाकी
ट्वीट विश्व पर्यावरण दिवस का संदेश, योगी आदित्यनाथ को जन्मदिन की बधाई,
ब्रह्मकुमारी समुदाय की आध्यात्मिक गुरु सरला दीदी के निधन पर शोक, क्रिकेट
टीम को वर्ल्ड कप के लिए शुभकामनाएं, गुरुवायुर और तिरुपति मंदिर के दर्शन
के सौभाग्य का उल्लेख, विदेश यात्राओं का विवरण, विदेशी नेताओं से
सौहार्द्रपूर्ण मुलाकातों के बारे में हैं.
शिखर धवन की टूटे अंगूठे
पर अफ़सोस जताने के बाद नरेंद्र मोदी की अगली ट्वीट में सांसदों की दावत की
तस्वीरें हैं, जिसमें वे ढाई किलो का सनी देयोल का हाथ थामे मुस्कुरा रहे
हैं और विजयी सांसदों को बधाई दे रहे हैं. उसके बाद वे फिर अपने प्रिय विषय
योग की तरफ़ लौट आए हैं.
वैसे भी मुज़फ़्फ़रपुर के गांव में बिलख रहे माँ-बाप ट्विटर थोड़े ही देखते हैं?
नई दिल्ली, प्रीति झा। ‘जो अगर करोगे योग तो रहोगे निरोग ’ सदियों पुराने इस चरितार्थ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक आयाम दे एक स्पेशल दिन के रूप में मनाने की घोषणा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस दुनियाभर के देशों में 21 जून को मनाया जाता है। 21 जून को योग दिवस मनाने का विचार सर्वप्रथम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने एक भाषण के दौरान प्रस्तावित किया था। उन्होंने इस दिन योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि उत्तरी गोलार्ध में 21 जून वर्ष का सबसे बड़ा दिन होता है। 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा की।
क्या है योग योग मन, मस्तिष्क एवं शरीर का एक अभ्यास है। योग की विभिन्न शैलियां होती हैं जिनमें शारीरिक मुद्राएं, सांस लेने की टेक्निक और मेडिटेशन एवं रिलैक्सेशन आदि शामिल है। योग यह सिर्फ व्यायाम भर नहीं है, बल्कि विज्ञान पर आधारित शारीरिक क्रिया है। इसमें मस्तिष्क, शरीर और आत्मा का एक-दूसरे से मिलन होता है। साथ ही मानव और प्रकृति के बीच एक सामंजस्य कायम होता है। यह जीवन को सही प्रकार से जीने का एक मार्ग है। गीता में भी श्रीकृष्ण ने कहा है कि योग: कर्मसु कौशलम यानी योग से कर्मों में कुशलता आती है। योग शब्द संस्कृत भाषा के युज से लिया गया है जिसका अर्थ है एक साथ जुड़ना। मन-मस्तिष्क एवं शरीर पर नियंत्रण रखने एवं खुशहाल जीवन के लिए योग काफी लोकप्रिय है। देखा जाए तो योग प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है लेकिन पिछले कुछ सालों से यह बहुत अधिक लोकप्रिय हो गया है। योग और ध्यान को अध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से हमारे शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए अनिवार्य माना गया है। योग के माध्यम से मस्तिष्क और शरीर का संगम होता है। योग का अभ्यास हमारे मन को संयमी बनाता है।
योग का महत्व आपके मन में एक प्रश्न बार-बार आता
होगा की हम योग क्यों करें? जबकि हमें तो मानसिक और शारीरिक रूप से भी कोई
समस्या भी नहीं हैं। जब हमारे पास समय ही नहीं हैं और हम स्वस्थ भी है तो
फिर हमें योग की क्या आवश्यकता है। इस क्यों को दूर करने को जीवन में योग
का महत्व समझाना होगा।
योग हमारे शरीर के साथ-साथ हमारे मन को भी स्वस्थ रखता है। योग से आनंद की अनुभूति होती है जैसे एक तरफ सुख और दूसरी तरफ दुःख होता है जबकि आनंद सुख से भी ऊपर होता है। जब पहली बार योग करते है तब समझ में आता है आनंद क्या होता है। उस आनंद की अनुभूति ना भोग में, ना संभोग में और ना ही अन्य किसी क्षणिक सुखों में है।
जीवन में योग का महत्व और लाभ योग शब्द के दो अर्थ
बताये गये हैं और दोनों ही अर्थ जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। पहला
अर्थ है- जोड़ और दूसरा अर्थ है- समाधि (ध्यान)। जब तक हम अपने शरीर को योग
कला से नहीं जोड़ते, ध्यान तक जाना असंभव हैं। ऊपर हमने जिस आनंद की चर्चा
की उसकी सीढ़ी योग के दूसरे अर्थ ध्यान से शुरू होती है। ध्यान योग का
अतिमहत्वपूर्ण भाग है। ध्यान के माध्यम से शरीर और मस्तिष्क का संगम होता
है। आज के समय में जीवनयापन के लिए दिन-रात भाग-दौड़, काम का प्रेशर, रिश्तो
में अविश्वास और दूरी आदि के कारण तनाव बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे
माहौल में मेडिटेशन से बेहतर और कोई विकल्प नहीं है। ध्यान से मानसिक तनाव
दूर होता है और मन को गहन आत्मिक शांति महसूस होती है जिससे कार्य शक्ति
में वृद्धि होती है, नींद अच्छी आती है, मन की एकाग्रता एवं धारणा शक्ति
बढती है।
आइये योग के पहले अर्थ को समझे। योग सभी के लिए जरूरी है। योग दर्शन और
धर्म से परे है और गणित से कुछ ज्यादा है। योग भारत की देन है विश्व को।
पूरा विश्व इस कारण से भारत को विश्वगुरु मानता है और योग को अपना रहा है।
योग से मानसिक व शारीरिक परेशानी होंंगे दूर अष्टांग योग, प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), प्रत्याहार (इंद्रियों का नियंत्रण), धारणा (एकाग्रता), ध्यान (मेडिटेशन), समाधि (से मुक्ति या परमात्मा से मिलन), ज्ञान योग, कर्म योग, भक्ति योग, हठ योग, कुंडलिनी/लय योग, इन सारे योगों से हमारी मानसिक व शारीरिक सभी परेशानी दूर हो सकते हैं। इसके नियमित अभ्यास से ना केवल सभी प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं बल्कि नियमित योग करने से शरीर मजबूत भी होता हैं। सुबह दैनिक कार्य के पश्चात खुली हवा में बैठकर नियमित 20-30 मिनट योगा करने से शरीर सुन्दर और चुस्त-दुरुस्त बनता है। योग से मन को शांति मिलती है जिससे रक्त संचार ठीक रहता है और हृदय भी स्वस्थ रहता है।
1.शरीर लचीला व मजबूत बनाता – जिम
में आप किसी खास अंग का ही व्यायाम कर पाते है जबकि योग से शरीर के संपूर्ण
अंग प्रत्यंगों, ग्रंथियों का व्यायाम होता है। जिस वजह से हमारे सारे अंग
सुचारू रूप से अपना कार्य करते है क्योंकि योग से हमारे शरीर के अंगों को
बल मिलता है जिससे हमारा शरीर दिन-प्रतिदिन लचीला और मजबूत होता जाता है।
2.तरो-ताजा और स्फूर्ति– नियमित योग
से आप खुद को प्रकृति के नजदीक महसूस करते हैं जिससे आप पूरे दिन तरोताजा
और स्फूर्ति महसूस करते है। मानसिक तौर पर भी आप शांत रहेंगे जिससे तनाव भी
दूर होगा।
3. मन को रखे शांत – जब मन-मस्तिष्क शांत होंगे तो
तनाव भी दूर होगा। नियमित योग आसनों और ध्यान से मस्तिष्क शांत होता है और
शरीर संतुलित रहता है। योग से दिमाग के दोनों हिस्से दुरुस्त काम करते है
जिससे आंतरिक संचार ठीक होता है। नियमित योग से सोचने की क्षमता और
सृजनात्मकता वाले हिस्सों में संतुलन बढ़ता है। इससे बुद्धि तेज और शार्प
होती है साथ ही आत्मनियंत्रण की शक्ति में भी तेजी से वृद्धि होती है।
4. रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती– योगाभ्यास से चेहरे पर
चमक आती है। शरीर में दिन-प्रतिदिन रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती हैं।
बुढ़ापे में भी स्वस्थ बने रहते हैं। शरीर निरोग, बलवान और स्वस्थ बनता है।
5. तनाव से रखे दूर – योग के नित्य अभ्यास से
मांसपेशियों की अच्छी कसरत होती है। जिस कारण तनाव दूर होता है, ब्लड
प्रेशर-कॉलस्ट्रॉल कंट्रोल होता है, नींद अच्छी आती है, भूख भी अच्छी लगती
है और पाचन भी सही रहता है। इसके नियमित अभ्यास से तनाव धीरे-धीरे पूर्णरूप
से खत्म हो जाता है।
6. दर्द और मोटापा से दूर– योग से शरीर फ्लेक्सिबल
होता है और शरीर को शक्ति मिलती है। इसके नियमित अभ्यास से पीठ, कमर,
गर्दन, जोड़ों के दर्द की समस्या तो दूर होती ही है साथ ही योग आपके शरीर
की खराब मुद्रा की संरचना को ठीक करता है जिससे भविष्य में होने वाले दर्द
से बचा जा सकता है। नियमित योगा से शरीर की कैलोरी बर्न होती है और मोटापा
घटते जाता है जिससे शरीर का वजन नियंत्रित रहता है।
7. रोग से दूर – योग से श्वास की गति पर नियंत्रण
बढ़ता है जिससे श्वास सम्बन्धित रोगों में बहुत लाभ मिलता है जैसे दमा,
एलर्जी, साइनोसाइटिस, पुराना नजला, सर्दी-जुकाम आदि रोगों में तो योग का ही
अंग प्राणायाम बहुत फायदेमंद है। ऐसे आसन जिनमें कुछ समय के लिये सांस को
रोक कर रखा जाता है। जो हृदय, फेफड़े और धमनियों को स्वस्थ रखने में सहायक
होता है। ऐसे आसन आपके दिल को फिट रखते हैं। इससे फेफड़ों को ऑक्सीजन लेने
की क्षमता बढ़ती है जिससे शरीर की कोशिकाओं को ज्यादा ऑक्सीजन मिलता है।
जिससे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
8. रक्त-संचार सही करता– विभिन्न प्रकार के योग और
प्राणायाम से शरीर में रक्त का प्रभाव ठीक होता है। नित्य योग से मधुमेह का
लेवल घटता है। यह बैड कोलेस्ट्रोल को कम करता है इस कारण मधुमेह के
रोगियों के लिए योगा बेहद आवश्यक है। सही रक्त-संचार से शरीर को ऑक्सीजन और
पोषक तत्वों का संवहन अच्छा होता है जिससे त्वचा और आन्तरिक अंग स्वस्थ
बनते हैं।
9.प्रेगनेंसी में लाभ – गर्भावस्था के दौरान नियमित
योगा करने से शरीर स्वस्थ रहता है। शरीर से थकान और तनाव दूर होता है जो
माँ और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। गर्भावस्था में होने
वाली कोई भी समस्या जैसे- पीठ दर्द, कमर दर्द, पैरों में खिचाव, नींद ना
आना, चिड़चिड़ापन, अपच, श्वास संबंधित सभी समस्यायों से मुक्ति मिल जाती
है। गर्भावस्था के दौरान किस महीने में कौन-कौन से योगा कर सकते है इसकी
सलाह अपने चिकित्सक से जरूर ले और योगा एक्सपर्ट की निगरानी में ही योगा
करें।
10. मासिक धर्म में – योग के नित्य अभ्यास से मासिक
धर्म में होने वाली पीड़ा से महिलाओं को मुक्ति मिलती है। पीरियड में
नियमितता रहती है, शरीर में इस दौरान आलस, घबराहट, चक्कर आना जैसी समस्याओं
से भी निजात मिलती है। शरीर में फुर्ती और चुस्ती बनी रहती है।
11. रक्त प्रवाह : जब शरीर में रक्त का संचार बेहतर
होता है, तो सभी अंग बेहतर तरीके से काम करते हैं। साथ ही शरीर का तापमान
भी नियंत्रित रहता है। रक्त प्रवाह के असंतुलित होते ही शरीर कई तरह की
बीमारियों का शिकार होने लगता है, जैसे – ह्रदय संबंधी रोग, खराब लिवर,
मस्तिष्क का ठीक से काम न करना आदि। ऐसे में योग करने से रक्त का प्रवाह
अच्छी तरह होता है। इससे सभी अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते
हैं।
12. संतुलित रक्तचाप : गलत जीवनशैली के कारण कई लोगों
रक्तचाप की समस्या से जूझ रहे हैं। अगर आपको भी रक्तचाप से जुड़ी कोई
परेशानी है, तो आज से ही किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में योग करना शुरू
कर दें। योग का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि प्राणायाम करने से शरीर को
पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा मिलती है और तंत्रिकाओं की कार्यप्रणाली बेहतर
होती है। साथ ही ह्रदय गति सामान्य होती है।
13. बेहतर श्वसन प्रणाली : श्वसन प्रणाली में आया कोई
भी विकार हमें बीमार करने के लिए काफी है। ऐसे में योग हमें बताता है कि
जीवन में सांस का क्या महत्व है, क्योंकि हर योगासन सांसों पर ही आधारित
है। जब आप योग करते हैं, तो फेफड़े पूरी क्षमता के साथ काम करने लगते हैं,
जिससे सांस लेना आसान हो जाता है।
14. गैस से छुटकारा : योग के लाभ में गैस से छुटकारा
पाना भी है। गैस की समस्या किसी को भी हो सकती है। इसमें बच्चे, बुढ़े,
महिला, पुरुष सभी शामिल हैं। यह समस्या मुख्य रूप से पाचन तंत्र के ठीक से
काम न करने के कारण होती है। इसे ठीक करने के लिए योग बेहतरीन उपाय है। योग
पाचन तंत्र को बेहतर करता है, जिससे कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं
जड़ से खत्म हो सकती हैं।
15. दर्द सहने की क्षमता : शरीर में कहीं भी और कभी भी
दर्द हो सकता है। खासकर, जोड़ों में दर्द को सहना मुश्किल हो जाता है।
वहीं, जब आप योग करते हैं, तो शुरुआत में इस दर्द को सहने की शारीरिक
क्षमता बढ़ने लगती है। साथ ही नियमित अभ्यास के बाद यह दर्द कम होने लगता
है।
16. प्रतिरोधक क्षमता : बीमारियों से लड़ने के लिए रोग
प्रतिरोधक क्षमता का बेहतर होना जरूरी है। प्रतिरोधक प्रणाली के कमजोर
होने से शरीर विभिन्न रोग का आसानी से शिकार बन जाता है। आप चाहे स्वस्थ
हैं या नहीं हैं, दोनों ही स्थिति में योग करना फायदे का सौदा साबित होगा।
योग से प्रतिरोधक प्रणाली बेहतर होती है।
17. नई ऊर्जा : जीवन को सकारात्मक तरीके से जीने और
काम करने के लिए शरीर में ऊर्जा का बना रहना जरूरी है। इसमें योग आपकी मदद
करता है। योग को करने से थकावट दूर होती है और शरीर नई ऊर्जा से भर जाता
है।
18. बेहतर मेटाबॉलिज्म : हमारे शरीर के लिए
मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया जरूरी है। इस प्रक्रिया से ही शरीर को भोजन के जरिए
ऊर्जा मिलती है, जिससे हम अपने दिनभर के काम कर पाते हैं। जब पाचन तंत्र,
लिवर और किडनी अच्छी तरह काम करते हैं, तो मेटाबॉलिज्म भी ठीक से काम करता
है। इस अवस्था में योग का लाभ इसलिए है, क्योंकि योग के जरिए अपच और कब्ज
को ठीक कर मेटाबॉलिज्म को बेहतर किया जा सकता है।
19. नींद : दिनभर काम करने के बाद रात को अच्छी नींद
लेना जरूरी है। इससे शरीर को अगले दिन फिर से काम करने के लिए तैयार होने
में मदद मिलती है। पर्याप्त नींद न लेने पर दिनभर बेचैनी, सिरदर्द, आंखों
में जलन और तनाव रहता है। चेहरे पर भी रोनक नजर नहीं आती। वहीं, अगर आप
नियमित योग करते हैं, तो मन शांत होता है और तनाव से छुटकारा मिलता है,
जिससे रात को अच्छी नींद सोने में मदद मिलती है।
20. संतुलित कोलेस्ट्रॉल : जैसा कि हमने पहले भी बताया
था कि योग करने से शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। इससे नसों में
रक्त का थक्के नहीं बन पाते और अतिरिक्त चर्बी भी साफ हो जाती है। यही कारण
है कि कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित किया जा सकता है। योग एचडीएल यानी अच्छे
कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है, जबकि एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को खत्म करता
है।
21. माइग्रेन : अगर माइग्रेन का मरीज योग करता है, तो
उसे सिर में होने वाले दर्द से राहत मिल सकती है। योग मांसपेशियों में आए
खिंचाव को कम करता है और सिर तक पर्याप्त में ऑक्सीजन पहुंचती है, जिससे
माइग्रेन में राहत मिलती है।
22. ब्रोंकाइटिस : मुंह, नाक और फेफड़ों को बीच हवा
मार्ग को श्वास नली कहते हैं। जब इसमें सूजन आ जाती है, तो सांस लेना
मुश्किल हो जाता है। चिकित्सीय भाषा में इस अवस्था को ब्रोंकाइटिस कहा जाता
है। योग इस सूजन को दूर कर सांस लेने में आपकी मदद करता है। योग के जरिए
फेफड़ों से ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में होती है। साथ ही
फेफड़ों में नई ऊर्जा का संचार होता है।
23. कब्ज : यह ऐसी बीमारी है, जो अन्य बीमारियों के
होने का कारण बनती है। पाचन तंत्र में समस्या आने पर कब्ज होती है। इसे ठीक
करने के लिए दवाइयों से बेहतर योग है। योग के जरिए कब्ज जड़ से खत्म हो
सकती है। योग सबसे पहले पाचन तंत्र को ठीक करेगा, जिससे कब्ज अपने आप ठीक
हो जाएगी और आप तरोताजा महसूस करेंगे।
24. बांझपन व रजोनिवृत्ति : अगर कोई प्रजनन क्षमता को
बेहतर करना चाहता है, तो इसके लिए भी योग के आसन का वर्णन किया गया है। योग
के जरिए शुक्राणु कम बनने की समस्या, यौन संबंधी कोई समस्या, फैलोपियन
ट्यूब में आई कोई रुकावट या फिर पीसीओडी समस्या को ठीक किया जा सकता है।
इसके अलावा, रजोनिवृत्ति से पहले और उस दौरान नजर आने वाले नकारात्मक
लक्षणों को भी योग के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।
25. साइनस व अन्य एलर्जी : साइनस के कारण नाक के आसपास
की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। इससे सांस लेने में परेशानी होती है।
इस समस्या के लिए भी योग हर लिहाज से बेहतर है। साइनस में सांस संबंधी योग
यानी प्राणायाम करने से नाक व गले की नलियां में आई रुकावट दूर होती है और
सांस लेना आसान हो जाता है। इसके अलावा, अन्य प्रकार की एलर्जी को भी योग
से ठीक किया जा सकता है।
26. कमर दर्द : आजकल हमारा ज्यादा काम बैठकर होता है। इस वजह से किसी न किसी को कमद दर्द की शिकायत रहती है। अगर आप योग्य प्रशिक्षिक की निगरानी में योग करें, तो रीढ़ की हड्डी में लचक आती है, जिससे किसी भी तरह का दर्द दूर किया जा सकता है।
यूपी के बरेली में गंभीर रूप से बीमार 5 दिन की एक बच्ची के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ कमलेंद्र स्वरूप गुप्ता को निलंबित कर दिया है. इसी मामले में जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ अलका शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. जानकारी के अनुसार बीमार बच्ची को लेकर उसके पिता जिला अस्पताल पहुंते तो वहां बाल रोग विशेषज्ञ होने के बाद भी उसका इलाज न कर उसे महिला अस्पताल भेज दिया गया. महिला अस्पताल में भी बच्ची का इलाज नहीं किया गया और उसे वापस जिला अस्पताल भेज दिया गया. इस दौरान बच्ची के पिता डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाते रहे लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. करीब 3 घंटे दोनों अस्पतालों के बीच आने-जाने के दौरान बच्ची ने दादी की गोद में ही दम तोड़ दिया था.
बिना इलाज पिता की गोद में बच्ची ने तोड़ा दम, CM योगी ने इन 2 सीएमएस पर गिराई गाज
बरेली में गंभीर रूप से बीमार एक बच्ची के इलाज को लेकर जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों द्वारा बरती गई लापरवाही को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया है.
यूपी के बरेली में गंभीर रूप से बीमार एक बच्ची के इलाज में लापरवाही के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कमलेंद्र स्वरूप गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है. इसी मामले में जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. राज्य सरकार के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि बरेली में गंभीर रूप से बीमार एक बच्ची के इलाज को लेकर जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों द्वारा बरती गई लापरवाही को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया है.
ये है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार बीमार बच्ची को लेकर उसके पिता जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां बाल रोग विशेषज्ञ होने के बाद भी उसका इलाज न कर उसे महिला अस्पताल भेज दिया गया था. महिला अस्पताल में भी इलाज का कोई प्रयास नहीं किया गया और उसे वापस जिला अस्पताल भेज दिया गया था. इस मामले की जानकारी होने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला अस्पताल के सीएमएस को निलंबित करने व महिला चिकित्सालय की सीएमएस के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं.
पांच दिन की बच्ची का इलाज कराने बुधवार को जिला अस्पताल पहुंचे एक पिता को अस्पताल के डॉक्टर तीन घंटे तक दौड़ लगवाते रहे. जिला अस्पतालसे उन्हें महिला अस्पताल भेजा गया. महिला अस्पताल के डॉक्टरों ने फिर जिला अस्पताल भेज दिया. तीन घंटे तक पिता बच्ची के इलाज की भीख मांगता रहा, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा. आखिरकार बच्ची ने पिता की गोद में ही दम तोड़ दिया. बच्ची की मौत के बाद एडी हेल्थ ने जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है.
बिहार में चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या 135 पहुंच गई है. पूरे मामले में सरकार खामोश है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में व्यस्त हैं, तो डिप्टी सीएम सुशील मोदी पटना में.
बिहार में चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या 135 पहुंच गई है.
पूरे मामले में सरकार खामोश है. सिर्फ मुजफ्फरपुर में ही 117 बच्चों की मौत
हो गई. 12 मौतें मोतिहारी और 6 मौतें बेगूसराय में हुई हैं. मुख्यमंत्री
नीतीश कुमार दिल्ली में व्यस्त हैं, तो डिप्टी सीएम सुशील मोदी पटना में.
हर कोई सवाल पूछ रहा है कि बच्चों की सांसें छिनने का सिलसिला कब खत्म
होगा? फिलहाल इसका जवाब किसी के पास नहीं है.
इस बीच बुधवार को मुजफ्फरपुर के अस्पताल में चमकी बुखार के 16 नए मामले
आए. मोतिहारी के सदर अस्पताल में बुधवार को 19 बच्चे भर्ती हुए. बेगूसराय
में भी 3 नए केस सामने आए. मासूमों की मौत का केंद्र बन चुके मुजफ्फरपुर
मेडिकल कॉलेज में हालात बदलने की कोशिश की जा रही है.
राहत कि बात ये है कि अस्पताल में कूलर लग गए हैं. एसी लग गए हैं, लेकिन
बिजली की कमी फिर मुंह चिढ़ा रही है. मुजफ्फरपुर अस्पताल में बिजली का नया
ट्रांसफॉर्मर जोड़ दिया गया है. केंद्र से 15 लोगों की टीम आ चुकी हैं,
जिनकी मदद ली जा रही है. मुजफ्फरपुर अस्पताल के आईसीयू में 17 बेड और जोड़े
गए हैं.
कैदी वार्ड को शिशु वार्ड में बदल दिया गया है. मुजफ्फरपुर प्रशासन ने
लोगों को जागरुक करने के लिए 32 लोगों की टीम बनाई है. जिन जगहों से ज्यादा
मरीज आ रहे हैं, वहां 10 अतिरिक्त एबुलेंस को लगाया गया है. घर-घर लोगों
को ओआरएस बांटने की तैयारी है.
देश के बाकी हिस्सों में भी चमकी बुखार का डर राज्य सरकारों को सता रहा
है. ओडिशा में लीची के सैंपल लेकर जांच की जा रही है. राजस्थान सरकार ने
चिकित्सा विभाग को पहले से ही सतर्क रहने को कहा है. झारखंड में भी सभी
अस्पतालों को अलर्ट रहने को कहा गया है.
क्या है चमकी बुखार के लक्षण
ये एक संक्रामक बीमारी है. इस बीमारी के वायरस शरीर में पहुंचते ही खून
में शामिल होकर अपना प्रजनन शुरू कर देते हैं. शरीर में इस वायरस की संख्या
बढ़ने पर ये खून के साथ मिलकर व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं.
मस्तिष्क में पहुंचने पर ये वायरस कोशिकाओं में सूजन पैदा कर देते हैं,
जिसकी वजह से शरीर का ‘सेंट्रल नर्वस सिस्टम’ खराब हो जाता है.
चमकी बुखार में बच्चे को लगातार तेज बुखार चढ़ा रहता है. बदन में ऐंठन के साथ बच्चा अपने दांत पर दांत चढ़ाए रहता हैं. शरीर में कमजोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता रहता है. शरीर में कंपन के साथ बार-बार झटके लगते रहते हैं. यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है.
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह लगातार जारी है. सरकार गिराने के लिए उन्होंने (भाजपा) धन तैयार रखा है.’
बेंगलुरू:
कुछ
समय तक शांति के बाद कर्नाटक में सरकार गिराने के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ का डर
गठबंधन सरकार को फिर से सताने लगा है. मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने
मंगलवार को भाजपा पर उनकी पार्टी के एक विधायक को घूस देने की कोशिश का
आरोप लगाया. रामनगर में एक गांव में जनसभा को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी
ने कहा कि सरकार गिराने के लिए निरंतर प्रयास हो रहा है और कौन इसके पीछे
है, वह उसे जानते हैं.
अपने दावे के समर्थन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह रामनगर से बिदादी जा रहे थे तो सोमवार रात ग्यारह बजे के करीब उनके एक विधायक ने उनसे बात की. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘विधायक ने कहा कि आधे घंटे पहले भाजपा के एक नेता ने उन्हें फोन किया. नेता ने कहा कि कल शाम तक सरकार गिरने वाली है.’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘उस नेता ने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस के नौ विधायक पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं. नेता ने कहा कि यदि वह (विधायक) सहमत होते हैं तो उनके ठिकाने पर 10 करोड़ रुपये पहुंचा दिए जाएंगे.’
K'taka CM HD Kumaraswamy: One of our MLAs called me after he got a call by a BJP leader. They offered him Rs 10 Cr to leave JD(S) & join BJP. These attempts are being done continuously by BJP leaders. But by God's grace & your blessings this govt is safe for another 4 yrs (18.02) pic.twitter.com/YJRFTjwbwO
#WATCH Karnataka CM in Channapatna yesterday: I promise I'll fulfill your expectations.I can't express pain I am going through everyday. I want to express it with you, but cannot , but I need to solve pain of people of state. I have responsibility of running Govt smoothly pic.twitter.com/Tz2AaitQNq
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह लगातार जारी है. सरकार गिराने के लिए उन्होंने (भाजपा)धन तैयार रखा है.’ कुमारस्वामी ने न तो उस विधायक का नाम, न ही भाजपा के उस नेता का नाम बताया जिसने उनसे संपर्क किया था. भाजपा प्रवक्ता जी मधुसूदन ने कहा कि मुख्यमंत्री बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.
साथ
ही कुमारस्वामी ने कहा, ‘मैं वादा करता हूं कि आपकी उम्मीदों को पूरा
करूंगा. मैं हर रोज जिस दर्ज से गुजर रहा हूं, उसे बयां नहीं कर सकता. मैं
आपके साथ इस बांटना चाहता हूं, लेकिन नहीं कर सकता. लेकिन प्रदेश के लोगों
की हर समस्या को दूर करने की जरूरत है. मेरे पास सरकार को सुचारू रूप से
चलाने की जिम्मेदारी है.’
यूपी में अखिलेश और मायावती का गठबंधन भले ही टूट गया हो, लेकिन मुंह से केवल फूल बरस रहे हैं. दोनों ही नेताओं ने कल से लेकर आज तक एक-दूसरे पर एक भी तंज नहीं कसा है. दोनों नेताओं ने केवल यह बात कही कि लोकसभा चुनाव में यह साथ कारगर सिद्ध नहीं हुआ. भविष्य में संभावना बनी तो फिर साथ आने की सोचेंगे
मायावती ने समाजवादी पार्टी से अपना गठबंधन तोड़ लिया है. मायावती ने कहा कि वह यूपी में होने वाले उप-चुनाव में समाजवादी पार्टी से अलग चुनाव लड़ेंगी. मयावाती के इस ऐलान के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि वह कि उनका यह प्रयोग फेल हो गया है. मायावती ने गठबंधन तोड़ते समय कहा कि वह इसलिए गठबंधन तोड़ रही हैं क्योंकि समाजवादी पार्टी का वोट ट्रांसफर नहीं हुआ है. अगर हम आंकड़े देखें तो मायावती की यह बात सच नहीं है. क्योंकि जिस 38 सीटों पर समाजवादी पार्टी लड़ी थी वहां बीएसपी का वोट बढ़ा है. कुछ सीटों पर तो बएसपी का वोट दोगुना बढ़ा है.
संसद भवन में एसपी सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने शपथ ग्रहण के बाद वंदे मातरम् कहने से साफ इनकार कर दिया। इस मामले पर विवाद शुरू होने के बाद पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी।
लखनऊ संसद भवन में शपथ ग्रहण के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव द्वारा वंदे मातरम् ना कहने के मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है। एक ओर जहां सांसद शफीकुर्रहमान ने वंदे मातरम् को इस्लाम के खिलाफ बताया है, वहीं समाजवादी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है।
मंगलवार को इस मुद्दे पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अखिलेश ने कहा, ‘मैं कह रहा हूं कि धरती मां मेरी है और धरती मां से बड़ा कौन है।
वंदे मातरम् का नारा इस्लाम के खिलाफ: बर्क शपथ ग्रहण के बाद बर्क ने नारा लगाया, ‘भारत का संविधान जिंदाबाद’। उन्होंने आगे कहा कि वह वंदे मातरम् नहीं कहेंगे। संभल के सांसद ने कहा, ‘जहां तक वंदे मातरम् का ताल्लुक है, यह इस्लाम के खिलाफ है। हम इसे नहीं कह सकते हैं।’ इस दौरान सांसदों ने जोर-जोर से वंदे मातरम् के नारे लगाए। कुछ सासंदों ने बर्क का खुलकर विरोध भी किया।
ओवैसी के शपथ ग्रहण के समय लगे नारे इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी के शपथ ग्रहण में भी जमकर नारे लगाए गए थे। ओवैसी जब शपथ के लिए उठे तो सांसदों ने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। सासदों के नारे को सुनकर ओवैसी ने हाथ से ‘और लगाओ नारे’ का इशारा किया। इस पर वंदे मातरम् के नारे जोर-जोर से लगाए जाने लगे। शपथ ग्रहण के बाद ओवैसी ने ‘जय भीम, जय भीम, अल्लाह-हू-अकबर, जय हिंद’ के नारे लगाए।