मॉस्को के पास मितशची में स्थित पॉवर स्टेशन में लगी आग से 50 मीटर ऊंची लपटों की तस्वीर सामने आ रही है. रूसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक इस घटना में 8 लोग घायल हो गए हैं.
सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने लगे हैं. जिनमें
ये देखा जा सकता है कि आग कितनी भयानक है. रूस के इमरजेंसी मंत्रालय की तरफ
से बताया गया है कि पावर स्टेशन के अंदर जो हाई प्रेशर गैस पंप है, उसमें
आग लगी है. इसकी वजह से आसपास की बिल्डिंग में भी असर फैल सकता है.
घटना को देखते हुए फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गई हैं और आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है.
अगगर इस पावर स्टेशन की बात करें तो ये 1992 से काम कर रहा है. इस स्टेशन की कैपेसिटी 1068 मेगावाट है. यहां अधिकतर प्राकृतिक गैस का ही इस्तेमाल होता है. मितशची रूस की राजधानी मॉस्को से सिर्फ 20 किमी. ही दूर है.
Selected startups will get business licences and office set-up in Dubai
Looking to transform itself into an innovation hub, Dubai is wooing
entrepreneurs from India, the third biggest startup base in the world,
to set up shops in the emirate.
The focus is on technology-driven
startups, wherein the authorities are offering easier business
licences, office spaces and access to funding.
Dubai grew to
prominence first as a trading hub, and then as a construction, tourism
and manufacturing centre. However, it grew at 1.9 per cent in 2018, the
slowest growth since the post-crisis time in 2010.
“When we
decided to launch the programme of attracting overseas startups here,
naturally the first choice was India, as 30 per cent co-founders of our
Dubai Startup Hub have Indian origin,” Natalia Sycheva, manager,
entrepreneurship department of Dubai Chamber of Commerce said.
“We
have a strong focus on India and we realise how our incubators will
benefit from Indian talent,” she said, adding that the chamber has
launched Dubai Startup Hub to attract startups here.
“We would like to have around a couple of hundreds of startups, to bring their businesses to Dubai,” she added.
They are looking at companies in emerging technologies like blockchain,
artificial intelligence and digital transformations, with a focus on
how their solutions can be applied to help the local economy, she said.
These startups should bring changes in e-commerce, constction, logistics and retail sectors, she said.
The
hub organised roadshows at the Indian startup capital of Bengaluru and
Delhi last month to identify and attract high-potential startups from
India.
Selected startups will get business licences and an office
set-up in Dubai as well as assistance in getting access to various
government or private sector funding, she said.
Sycheva added that efforts are also on to get startups from different African countries.
The chamber feels that there is a lot of potential for the growth of trade between India and the United Arab Emirates (UAE).
“India
is Dubai’s second-largest trading partner with $31.4 billion worth of
bilateral non-oil trade in 2018, a 17 per cent increase compared to the
previous year. But we see a lot of opportunity in the increase of this
figure in coming future,” she said.
The local government is
expecting approximately 1.5 per cent of the UAE’s annual forecast of the
gross domestic product (GDP) during the six months of the Dubai Expo
2020 to be held next year, Jon Bramley, vice president, communication of
the Dubai Expo 2020 said.
He said India is participating in a
big way at the Expo, which will feature 192 individual country pavilions
in 4.38 square km area.
The World Expo is one of the world’s
oldest and largest international events, taking place every five years
and lasting for six months, which serve as a bridge between governments,
companies, international organisations and citizens.
समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए शनिवार को कहा कि सूबे में ‘अंधेरनगरी, चौपट राजा’ की कहावत चरितार्थ हो रही है।
लखनऊ।समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए शनिवार को कहा कि सूबे में ‘अंधेरनगरी, चौपट राजा’ की कहावत चरितार्थ हो रही है।
अखिलेश ने यहां एक बयान में कहा कि भाजपा सरकार आंकड़े दबाकर प्रदेश में कानून व्यवस्था के नियंत्रण में होने का खोखला दावा कर रही है जबकि कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब हत्या, लूट, बलात्कार की घटनाएं न घटती हों। भाजपा सरकार के बड़बोलेपन का अपराधियों पर तो कोई असर नहीं हुआ, उल्टे पुलिस ही कानून हाथ में लेकर लोगों को प्रताड़ित करने लगी है।
उन्होंने
कहा कि हालात किस कदर बिगड़े हैं इसे जाहिर करने के लिए एक घटना ही
पर्याप्त है। लखनऊ में एक किशोर को घर से उठाकर पुलिस चौकी में बंद रखा
गया। निर्दोष से जुर्म जबरन कुबूलवाने के लिए उसको बर्बरता से पीटा गया और
बूट से पैर कुचल डाले गये। जब ये हाल है तो मुख्यमंत्री योगी आखिर कैसे
अपने राज में शांति-व्यवस्था बनी रहने की बात करते हैं?
पूर्व
मुख्यमंत्री ने हाल में हुई कुछ वारदात का जिक्र करते हुए कहा कि सच तो यह
है कि प्रदेश में भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल है। उसके राज में कोई भी
व्यक्ति न तो सड़क पर सुरक्षित है और ना ही जेल में। जेलों में माफिया डान
अपने दरबार सजा रहे हैं और वहीं से आपराधिक गतिविधियों का विस्तार कर रहे
हैं।
सीएम योगी ने लखनऊ में आयोजित प्रसे कॉन्फ्रेंस में पूरे विश्वास के साथ कहा कि ‘हमारे आने के बाद कौन पलायन करेगा?’
मेरठ से कुछ मुस्लिम परिवारों के पलयान की खबर पर आज उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि मेरठ से कोई पलायन नहीं हुआ है। सीएम योगी ने लखनऊ में आयोजित प्रसे कॉन्फ्रेंस में पूरे विश्वास के साथ कहा कि ‘हमारे आने के बाद कौन पलायन करेगा?’ विपक्षियों पर हमला बोहलते हुए योगी ने कहा कि ‘जिनके लिए अंगूर खट्टे, वो आरोप लगा रहे हैं’। हमने लोगों के बीच विश्वास की भावना जगाई है, ऐसे में हम लोगों के रहते यूपी से पलायन नहीं हो सकता है। प्रदेश में बढ़ते अपराध पर टिप्पणी करते हुए सीएम योगी ने कहा कि बीजेपी की नीति क्राइम और करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की रही है और सरकार इस नीति पर बखूबी काम कर रही है।
बता दें कि मेरठ से कुछ दिन पहले खबर आई थी कि एक समुदाय के
लोग दूसरे समुदाय पर परेशान करने का आरोप लगा रहे हैं. लेकिन पुलिस प्रशासन
का साफ कहना है कि पलायन जैसी कोई बात नहीं है। ये मामला आपसी विवाद का
है। हालांकि वहां कई मकानों और प्लाट्स पर बिकाऊ लिखा हुआ है।
आरोप है कि मेरठ शहर के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र अंतर्गत प्रह्लादनगर में बहुसंख्यक वर्ग के कोई 200 परिवार अपना मकान बेचकर पलायन कर चुके हैं। इस आरोप के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आ गया। आरोप है कि इनमें से अधिकांश मकानों की खरीद-बिक्री बीते पांच-छह वर्षों के भीतर हुई है। यहां रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों को औने-पौने दाम पर मकान बेचकर चले गए हैं।
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच हिंसा की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच हिंसा की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य में हुए पंचायत चुनावों से शुरू हुए इस सिलसिले ने लोकसभा चुनावों तक आते-आते जोर पकड़ लिया, और अब दोनों ही दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे पर लगातार घातक हमले कर रहे हैं। ताजा मामले में तृणमूल कांग्रेस के विधायक उदयन गुहा ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर उनको परेशान करने और कार में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुहा का आरोप है कि रविवार को पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले में जब वह पार्टी के एक कार्यक्रम में जा रहे थे, तब बीजेपी कार्यकर्ताओं ने फिजूल सवाल पूछकर उन्हें परेशान किया और उनकी कार में तोड़फोड़ की। उन्होंने कहा, ‘मैंने जनसंयोग यात्रा की योजना बनाई है। इसी सिलसिले में मैं सीतलकुची जा रहा था। कुछ भाजपा समर्थकों ने मेरा रास्ता रोक लिया और ‘गो बैक’ के नारे लगाने लगे। जब मैं उनसे भिड़ गया तब वे मुझसे ऊलजुलूल सवाल करने लगे और उन्होंने मेरी कार में तोड़फोड़ की।’ वहीं, पुलिस ने कहा है कि जांच चल रही है और दोषियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
शाह ने लोकसभा में घाटी पर जारी चर्चा के दौरान यह भी कहा था कि यदि नेहरू ने देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को विश्वास में लिया होता तो आज पूरा कश्मीर हमारा होता।
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते शुक्रवार को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर की मौजूदा समस्याओं के लिए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि यदि सरदार वल्लभ भाई पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो आज कश्मीर समस्या न होती। शाह ने लोकसभा में घाटी पर जारी चर्चा के दौरान यह भी कहा था कि यदि नेहरू ने देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को विश्वास में लिया होता तो आज पूरा कश्मीर हमारा होता। हालांकि लालू प्रसाद यादव की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनता दल शाह के इन विचारों से सहमति नहीं रखती।
राष्ट्रीय जनता दल ने अमित शाह के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि यदि पटेल प्रधानमंत्री होते तो वाकई में कश्मीर समस्या नहीं होती, क्योंकि वहां का एक तिनका भी हमारा नहीं होता। RJD ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘अमित शाह ने ठीक कहा कि अगर पटेल PM होते तो कश्मीर समस्या नहीं होती! क्योंकि तब कश्मीर ही हमारा नहीं होता! इसका एक तिनका भी हमारा नहीं होता! पटेल कश्मीर को भारत में हरगिज़ रखना नहीं चाहते थे! पूरा का पूरा पाकिस्तान को ही देने के हक़ में थे! संघी भाजपाई मनगढ़ंत इतिहास पढ़ते हैं!’
आपको बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर को लेकर अपने इरादे साफ कर
दिए हैं। अपने जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान उन्होंने अलगाववादियों को साफ
संदेश दिया कि वह नरमी बरतने वाले नहीं हैं। अमित शाह पहले गृहमंत्री हैं,
जिन्होंने अलगाववादियों के साथ किसी भी बैठक का कोई संकेत नहीं दिया है।
अमित शाह का साफ कहना है कि अलगाववाद का समर्थन करने वाले उनसे किसी तरह की
रियायत की उम्मीद नहीं कर सकते और आतंकवाद एवं आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई
जारी रहेगी।
Kabir Singh Box Office Collection Day 5: शाहिद कपूर की ‘कबीर सिंह’ 100 करोड़ के पार, पांच दिन में ही कर डाला ये करिश्मा
Kabir Singh Box Office Collection Day 5: शाहिद कपूर की फिल्म ‘कबीर सिंह’ (Kabir Singh) ने पहले दिन 20.21 करोड़ से अपनी शानदार ओपनिंग की थी. रिलीज के बाद से ही फिल्म ने सिनेमा में अभी तक अपना जबरदस्त प्रदर्शन जारी रखा है.
नई दिल्ली:
Kabir Singh Box Office Collection Day 5: शाहिद कपूर (Shahid Kapoor) की फिल्म ‘कबीर सिंह’ (Kabir Singh) 100 करोड़ के क्लब में शामिल हो चुकी है. इस फिल्म की धुआंदार कमाई पांचवे दिन यानी 25 जून को भी जारी रही है. 20.21 करोड़ से बॉक्स ऑफिस पर अपनी शुरुआत करने वाली ‘कबीर सिंह’ (Kabir Singh Box Office Collection) फिल्म ‘भारत’ के बाद साल की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग वाली मूवी साबित हुई है. ‘बॉक्स
ऑफिस इंडिया’ की वेबसाइट के मुताबिक शाहिद कपूर (Shahid Kapoor) की फिल्म ‘कबीर सिंह’ (Kabir Singh) ने बीते मंगलवार यानी 25 जून को 16 करोड़ की कमाई की है. अपने दमदार प्रदर्शन से फिल्म ने अब तक करीब 104 करोड़ का आंकड़ा पार किया है.
श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र के ठाकरी गांव में सोहनलाल मेघवाल नामक किसान ने रविवार दोपहर जहर खाकर खुदकुशी की. 45 साल के सोहनलाल पर बैंक की तरफ से कर्ज चुकाने का दबाव बनाया जा रहा था.
किसानों को लेकर देश में लगातार कई बड़ी-बड़ी बातें होती हैं लेकिन उन पर अमल कम ही हो पाता है. ऐसा ही एक मामला राजस्थान के श्रीगंगानगर से सामने आया है. यहां पर कर्ज से परेशान चल रहे एक किसान ने खुदकुशी कर ली. उसे उम्मीद थी कि राज्य सरकार अपने वादे के मुताबिक कर्ज माफ कर देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बढ़ते हुए दबाव के बोझ में उसने अपनी जान दे दी.
ये मामला रविवार का है. किसान ने सुसाइड नोट में लिखा है कि उनकी मौत का जिम्मेदार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को माना जाए. अब यह मामला लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला तक पहुंच गया है. गंगानगर के सांसद ने इस मसले को ओम बिड़ला के सामने उठाया.
किसान की मौत के मुद्दे पर राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा कि अभी वह इसकी जांच करवा रहे हैं. उन्होंने कहा कि शायद वह किसान कर्ज में डूबा हुआ नहीं था, लेकिन जो भी हुआ वह दुखद है. सरकार किसानों के उज्जवल भविष्य के लिए कटिबद्ध है, हमने घोषणापत्र में भी किसानों के लिए बात की है.View image on Twitter
Sachin Pilot, Rajasthan Dy CM:Matter is under investigation.Incident (farmer suicide) is regrettable. From whatever info I have received so far, the person was not actually under debt. Govt of Rajasthan is fully committed in securing a better future for the framers in the state.632:10 PM – Jun 25, 201921 people are talking about thisTwitter Ads info and privacy
श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र के ठाकरी गांव में सोहनलाल मेघवाल नामक किसान ने रविवार दोपहर जहर खाकर खुदकुशी की. 45 साल के सोहनलाल पर बैंक की तरफ से कर्ज चुकाने का दबाव बनाया जा रहा था. लेकिन वह इस दबाव को झेल नहीं पाया. जहर खाने से पहले उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी डाला और कहा कि आप सभी को मेरा आखिरी राम-राम.
जब सोहनलाल को अस्पताल ले जाया गया, तो हालत गंभीर थी और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया. किसान की आत्महत्या के बाद परिवार परेशान और गुस्से में हैं. गांववालों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की. आनन-फानन में परिवार का कर्ज माफ करने का वादा करवाया गया और अंतिम संस्कार करवाया गया.
सोहनलाल ने मरने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उसने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया. सोहनलाल ने लिखा कि मेरी मौत की जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट हैं. उन्होंने वादा किया था कि सरकार आने के बाद दस दिन में कर्ज माफ हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका. मेरी लाश को तबतक ना उठाया जाए, जबतक उनके भाईयों का कर्ज माफ ना हो.
सुसाइड नोट में लिखा गया कि मेरी मौत का मुकदमा अशोक गहलोत पर किया जाए. यही कहते हुए उसने वीडियो भी पोस्ट किया. आत्महत्या के बाद डीएसपी जयसिंह तंवर ने बताया कि मामले में चुनाव के समय जो किसानों का कर्ज माफ़ करने की बात कही थी, वह पूरी नहीं होने पर किसान ने आत्महत्या का कदम उठाया है. इसकी जांच की जा रही है उसके बाद आगामी कारवाई की जाएगी.
गौरतलब है कि राजस्थान में हाल ही में विधानसभा चुनाव हुए थे. कांग्रेस की तरफ से कर्जमाफी को बड़ा मुद्दा बनाया गया था और दस दिन में किसानों के कर्ज को माफ करने का वादा किया गया था.
विदेश मंत्री एस जयशंकर फिलहाल संसद के किसी भी सदन का हिस्सा नहीं हैं. माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें गुजरात से राज्यसभा भेज सकती है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर सोमवार को औपचारिक तौर से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए. वह संसद भवन में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए. एस जयशंकर ने 30 मई को मोदी सरकार के शपथग्रहण समारोह में विदेश मंत्री पद की शपथ ली थी. अब 25 दिन बाद उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ले ली है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर फिलहाल संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें गुजरात से राज्यसभा भेज सकती है. बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और स्मृति ईरानी के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो गई हैं.
कैबिनेट मंत्री बनाए गए एस. जयशंकर को 6 महीने के भीतर संसद के किसी भी सदन का हिस्सा बनना होगा. 1977 बैच के विदेश सेवा के अधिकारी एस जयशंकर मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 2015 से 2018 तक विदेश मंत्रालय में सचिव रहे.
वह अमेरिका, चीन और चेक गणराज्य में भारत के एम्बेस्डर और सिंगापुर में हाई कमिश्नर के तौर पर कार्य कर चुके हैं. उन्हें चीन मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है. विदेश सचिव के रुप में कार्यकाल पूरा होने के बाद जयशंकर को टाटा समूह के वैश्विक कारपोरेट मामलों का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था.
मोदी सरकार में अहम ओहदे पर रहे जयशंकर को पीएम मोदी के विदेशी दौरों की सफलता का श्रेय भी दिया जाता है. कूटनीतिक मामलों में उनका अच्छा दखल माना जाता है. जयशंकर को चीनी मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है. वह चीन में राजदूत के तौर पर कार्य करने का भी अनुभव रखते हैं. ऐसे में उनके सामने पड़ोसी चीन के साथ संबंधों को मजबूती देने की चुनौती भी होगी.
नरेंद्र मोदी की चुप्पी भी एक ख़ास तरह से गूंजती है, जैसे कि उनके भाषण.
दरअसल,
लगातार सक्रिय और मुखर रहने वाले लोगों की चुप्पी पर अक्सर ध्यान चला जाता
है. जो नेता जनता से लगातार संवाद कर रहा हो, लेकिन एक ख़ास बड़े मुद्दे
पर चुप हो तो ये ख़याल आना लाजिमी है कि आख़िर इसकी वजह क्या है.
पीएम
के तौर पर अपने पिछले कार्यकाल के अंत में वे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के
साथ अपनी पहली प्रेस कॉन्फ़्रेंस में नज़र आए, लेकिन सुनाई नहीं दिए. सुनाई
दी उनकी गूंजती हुई चुप्पी.
प्रेस कॉन्फ़्रेंसों और सवालों के जवाब
देने से परहेज़ करने की पीएम मोदी की नीति के पीछे उनकी सोच चाहे जो भी हो,
लेकिन एकतरफ़ा संवाद उन्हें ख़ास पसंद हैं, इसके माध्यम के तौर पर
प्रधानमंत्री को ट्विटर विशेष प्रिय है. शपथ लेने के बाद @narendramodi ने
कुल 134 ट्वीट किए हैं जिनमें मुज़्फ़्फ़रपुर के बच्चों की बारी नहीं आ पाई
है.
गाय के नाम पर होने वाली हत्याओं, राफ़ेल, लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं और गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत जैसे अनेक मामलों में पूरे पांच साल तक लोगों ने नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल पर नज़र रखी और उन्हें निराशा ही हाथ लगी.
ऐसा नहीं है कि नरेंद्र मोदी ने इन मुद्दों पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने तब कहा जब उनका जी चाहा, उस वक़्त बिल्कुल नहीं, जब लोग चाहते हों कि वे कुछ कहें. बड़े राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय ज़ाहिर करने का समय ख़ुद चुनकर, प्रेस कॉन्फ़्रेंस न करके या सवालों के जवाब न देकर वे क्या जताना चाहते हैं?
वे शायद यही जताना चाहते हैं कि वे किसी के दबाव में नहीं हैं, वे किसी
और की नहीं, अपनी मर्ज़ी से चलते हैं, और उनसे मांगकर कोई जवाब नहीं ले
सकता. वे परिस्थितियों के अधीन काम नहीं करते बल्कि अपनी राजनीति के अनुरूप
परिस्थितियां खुद बनाते हैं.
इसे आप राजनीतिक चतुराई समझें, उनका
अहंकार समझें या अपने विरोधियों को बेमानी बनाने की कोशिश, यह आपकी मर्ज़ी
है. यह तो हम-आप सुनते ही रहे हैं कि प्रधानमंत्री से हर मामले पर लगातार
बोलते रहने की उम्मीद करना ग़लत है.
अब सवाल ये है कि ‘हर मामला’ क्या है, और ‘ख़ास मामला’ क्या है. इसके लिए नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल को ज़रा ग़ौर से देखना होगा.
मुज़फ़्फ़रपुर के बच्चों की मौत
बिहार में जहां भारतीय जनता पार्टी सत्ता में साझीदार है, जहां राज्य के
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे बीजेपी के नेता हैं, वहां इतनी बड़ी संख्या
में बच्चों की लगातार मौत की ख़बरें पिछले 20 दिनों से आ रही हैं.
मीडिया
ने देर से ही सही, हंगामाखेज़ रिपोर्टिंग शुरू की है यानी मामला राष्ट्रीय
सुर्खियों में है. मीडिया कवरेज के बारे में चर्चा करना यहां मकसद नहीं है
लेकिन ज़्यादातर चैनल यही बताने की कोशिश कर रहे हैं कि डॉक्टर बच्चों का
इलाज ठीक से नहीं कर रहे हैं, लीची से लेकर जापान तक की बातें हो रही हैं
लेकिन देश की सरकार की ज़िम्मेदारी की नहीं.
बहरहाल, 30 मई को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तकरीबन इसी समय से बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले से बच्चों की मौत की खबरें आनी शुरू हुई थीं, जब 20 से ज़्यादा दिन गुज़र चुके हैं, राज्य में 150 से अधिक बच्चे मौत की नींद सो चुके हैं. डॉक्टर इस बात पर आम राय रखते हैं कि इस बीमारी का सही तरीके से इलाज होने पर जानें बच सकती थीं यानी मेडिकल चूक नहीं, प्रशासनिक और व्यवस्थागत नाकामी है.
Dear @SDhawan25, no doubt the pitch will miss you but I hope you recover at the earliest so that you can once again be back on the field and contribute to more wins for the nation. https://t.co/SNFccgeXAo
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी
चौबे ने पटना में पत्रकारों के सवाल के जवाब ज़रूर दिए हालांकि उस प्रेस
कॉन्फ़्रेंस की ज़्यादा चर्चा केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री की झपकियों
की वजह से रही. मामले के बहुत बढ़ जाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश
कुमार ने अस्पतालों का दौरा ज़रूर किया लेकिन बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार
कौन है? इसका कोई जवाब न तो केंद्र सरकार के पास है, न राज्य सरकार के पास.
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बीस दिनों के बाद कहा है कि वे लोगों के दुख-दर्द को समझती हैं क्योंकि उनके भी बच्चे हैं.
प्रशासन और व्यवस्था के लिए कौन ज़िम्मेदार है? इसका जवाब मीडिया डॉक्टरों से मांग रहा है. इसी मामले पर चल रही बैठक में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके मंगल पांडे की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जाता है कि वे बीच बैठक में वे पूछ रहे थे कि “कितने विकेट गिरे?”
क्रिकेट की चिंता केवल बिहार के स्वास्थ्य मंत्री को ही नहीं है,
नरेंद्र मोदी की चुप्पी की ख़ास तौर से तब चर्चा में आई जब उन्होंने भारत
के सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन के टूटे अंगूठे पर कुछ इस तरह की भावना ज़ाहिर
की, “शिखर, बेशक पिच पर आपकी कमी खलेगी, लेकिन मैं उम्मीद करता हूँ कि आप
जल्द-से-जल्द ठीक हो जाएं और मैदान पर लौटकर देश की जीत में और योगदान करे
सकें.”
इसके अलावा, अपने दूसरा कार्यकाल शुरू करने के बाद से
नरेंद्र मोदी अनेक ट्वीट कर चुके हैं. उन पर एक नज़र डालना काफ़ी दिलचस्प
होगा. कुल 134 ट्वीट में से 32 तो सिर्फ़ अलग-अलग योगासनों के बारे में हैं
या फिर दुनिया भर में योग की लोकप्रियता पर हर्ष और गर्व दिखाने के लिए.
बाकी
ट्वीट विश्व पर्यावरण दिवस का संदेश, योगी आदित्यनाथ को जन्मदिन की बधाई,
ब्रह्मकुमारी समुदाय की आध्यात्मिक गुरु सरला दीदी के निधन पर शोक, क्रिकेट
टीम को वर्ल्ड कप के लिए शुभकामनाएं, गुरुवायुर और तिरुपति मंदिर के दर्शन
के सौभाग्य का उल्लेख, विदेश यात्राओं का विवरण, विदेशी नेताओं से
सौहार्द्रपूर्ण मुलाकातों के बारे में हैं.
शिखर धवन की टूटे अंगूठे
पर अफ़सोस जताने के बाद नरेंद्र मोदी की अगली ट्वीट में सांसदों की दावत की
तस्वीरें हैं, जिसमें वे ढाई किलो का सनी देयोल का हाथ थामे मुस्कुरा रहे
हैं और विजयी सांसदों को बधाई दे रहे हैं. उसके बाद वे फिर अपने प्रिय विषय
योग की तरफ़ लौट आए हैं.
वैसे भी मुज़फ़्फ़रपुर के गांव में बिलख रहे माँ-बाप ट्विटर थोड़े ही देखते हैं?