यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी में राहुल
गांधी की भविष्य की भूमिका पर रहस्य बना हुआ है और विभिन्न स्तरों पर पद से
त्यागपत्र देने वालों की झड़ी लगी हुई है।
नई दिल्ली: 2019 के लोकसभा चुनावों में हार के बाद से कांग्रेस पार्टी में उथल-पुथल का दौर जारी है। इसी कड़ी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात करेंगे। राहुल गांधी के अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा के बाद पार्टी द्वारा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से यह उनकी पहली मुलाकात होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी में राहुल गांधी की भविष्य की भूमिका पर रहस्य बना हुआ है और विभिन्न स्तरों पर पद से त्यागपत्र देने वालों की झड़ी लगी हुई है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी आज शाम गांधी के साथ बैठक में मौजूद रहेंगे। राहुल की इस बैठक का एजेंडा हालांकि साफ नहीं हो पाया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें कांग्रेस को हाल में संपन्न लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार, खासकर हिंदी पट्टी में मिली पराजय को लेकर गहन मंथन किया जाएगा। इसमें भी वे राज्य खासतौर पर चर्चा का केंद्र होंगे, जहां पार्टी पिछले साल दिसंबर में चुनाव जीतकर सत्ता में आई थी।
आपको बता दें कि कांग्रेस कार्यसमिति की 25 मई को हुई बैठक में गांधी ने
अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि
राहुल ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि गहलोत और कमलनाथ ने अपने बेटों
को पार्टी से आगे रखा। कांग्रेस अभी राहुल को पद पर बने रहने के लिए मनाने
में जुटी है। पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा के मुताबिक, ‘कांग्रेस कार्य
समिति ने राहुल जी का इस्तीफा न सिर्फ नामंजूर किया बल्कि यह आग्रह भी किया
कि वह पद पर बने रहें। हमारे राज्यों की इकाइयों ने भी प्रस्ताव पारित
करके भेजा जिसमें भी यही बात दोहराई गई कि वह अध्यक्ष बने रहें।
लोकसभा में शिवसेना डिप्टी स्पीकर पद पर भावना गवली का नाम आगे बढ़ा सकती है. सूत्रों का कहना है शिवसेना ने इस दिशा में अपनी दिलचस्पी जाहिर की है.
लोकसभा में शिवसेना डिप्टी स्पीकर पद पर भावना गवली का नाम आगे बढ़ा सकती है. सूत्रों का कहना है शिवसेना ने इस दिशा में अपनी दिलचस्पी जाहिर की है. महाराष्ट्र की यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से सांसद भावना गवली पांचवीं बार सांसद बनी हैं. वह दो बार वाशिम लोकसभा सीट से तो तीन बार यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से जीती हैं.
इससे पहले शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा था कि हमारी ये डिमांड नहीं है, ये हमारा नेचरल क्लेम है और हक है. ये पद शिवसेना को ही मिलना चाहिए.
पटनायक नहीं चाहते हैं डिप्टी स्पीकर पद
बताया जा रहा था कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) डिप्टी स्पीकर पद पर बीजू जनता दल (बीजद) के सदस्य को लाना चाहती थी, लेकिन बीजद इस पद को स्वीकार करने की इच्छुक नहीं है क्योंकि वह बीजेपी और कांग्रेस दोनों से समान रिश्ता बनाए रखना चाहती है.
वाईएसआर कांग्रेस ने पद के लिए रखी शर्त
इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस को भी डिप्टी स्पीकर पद का ऑफर दिया गया था, लेकिन उसने एक शर्त रख दी थी. वाईएसआर कांग्रेस का कहना है कि जब तक केंद्र आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देता, हम डिप्टी स्पीकर पद को स्वीकार नहीं करेंगे.
डिप्टी स्पीकर पर किसका हक?
अक्सर डिप्टी स्पीकर पद पर विपक्ष का हक होता है, लेकिन पिछली बार मोदी सरकार की ओर से इस परंपरा को भी बदल दिया गया. मोदी सरकार कार्यकाल-1 में डिप्टी स्पीकर का पद AIADMK के एम.थंबीदुरई के पास था. तब विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया था कि मोदी सरकार के प्रति AIADMK का रुख नरम है, इसी वजह से उन्हें ये पद दिया गया था.
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह लगातार जारी है. सरकार गिराने के लिए उन्होंने (भाजपा) धन तैयार रखा है.’
बेंगलुरू:
कुछ
समय तक शांति के बाद कर्नाटक में सरकार गिराने के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ का डर
गठबंधन सरकार को फिर से सताने लगा है. मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने
मंगलवार को भाजपा पर उनकी पार्टी के एक विधायक को घूस देने की कोशिश का
आरोप लगाया. रामनगर में एक गांव में जनसभा को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी
ने कहा कि सरकार गिराने के लिए निरंतर प्रयास हो रहा है और कौन इसके पीछे
है, वह उसे जानते हैं.
अपने दावे के समर्थन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह रामनगर से बिदादी जा रहे थे तो सोमवार रात ग्यारह बजे के करीब उनके एक विधायक ने उनसे बात की. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘विधायक ने कहा कि आधे घंटे पहले भाजपा के एक नेता ने उन्हें फोन किया. नेता ने कहा कि कल शाम तक सरकार गिरने वाली है.’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘उस नेता ने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस के नौ विधायक पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं. नेता ने कहा कि यदि वह (विधायक) सहमत होते हैं तो उनके ठिकाने पर 10 करोड़ रुपये पहुंचा दिए जाएंगे.’
K'taka CM HD Kumaraswamy: One of our MLAs called me after he got a call by a BJP leader. They offered him Rs 10 Cr to leave JD(S) & join BJP. These attempts are being done continuously by BJP leaders. But by God's grace & your blessings this govt is safe for another 4 yrs (18.02) pic.twitter.com/YJRFTjwbwO
#WATCH Karnataka CM in Channapatna yesterday: I promise I'll fulfill your expectations.I can't express pain I am going through everyday. I want to express it with you, but cannot , but I need to solve pain of people of state. I have responsibility of running Govt smoothly pic.twitter.com/Tz2AaitQNq
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह लगातार जारी है. सरकार गिराने के लिए उन्होंने (भाजपा)धन तैयार रखा है.’ कुमारस्वामी ने न तो उस विधायक का नाम, न ही भाजपा के उस नेता का नाम बताया जिसने उनसे संपर्क किया था. भाजपा प्रवक्ता जी मधुसूदन ने कहा कि मुख्यमंत्री बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.
साथ
ही कुमारस्वामी ने कहा, ‘मैं वादा करता हूं कि आपकी उम्मीदों को पूरा
करूंगा. मैं हर रोज जिस दर्ज से गुजर रहा हूं, उसे बयां नहीं कर सकता. मैं
आपके साथ इस बांटना चाहता हूं, लेकिन नहीं कर सकता. लेकिन प्रदेश के लोगों
की हर समस्या को दूर करने की जरूरत है. मेरे पास सरकार को सुचारू रूप से
चलाने की जिम्मेदारी है.’
भारतीय जनता पार्टी ने मिशन साउथ के तहत तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लिए एक खास प्लान बनाया है. इसके तहत बीजेपी तेलंगाना में कांग्रेस और आंध्र प्रदेश में तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) की जगह लेने की कवायद शुरू कर दी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारतीय जनता
पार्टी लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ सत्ता में वापसी करने में भले
ही कामयाब रही हो, लेकिन दक्षिण भारत में कर्नाटक-तेलंगाना छोड़ बाकी
राज्यों में उसके हाथ कुछ नहीं लगा है. यही वजह है कि उत्तर भारत के बाद
बीजेपी दक्षिण भारत के राज्यों में कमल खिलाने की रणनीति पर काम शुरू कर
दिया है. मिशन साउथ के तहत तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लिए एक खास प्लान
बनाया है. इसके तहत बीजेपी तेलंगाना में कांग्रेस और आंध्र प्रदेश में
तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) की जगह लेने की कोशिश में जुट गई है.
तेलंगाना में बीजेपी का प्लान
लोकसभा चुनाव में तेलंगाना की 17 संसदीय सीटों में से टीआरएस 9, बीजेपी
4, कांग्रेस 3 और AIMIM को 1 सीट मिली है. इसी तरह से पिछले साल हुए राज्य
विधानसभा चुनाव में कुल 119 सीट में से टीआरएस 88, कांग्रेस 19, AIMIM 7,
बीजेपी 1, टीडीपी 1 और एक सीट अन्य को मिली थी. दिलचस्प बात यह है कि
कांग्रेस के कई विधायक बगावत कर टीआरएस के साथ जुड़ गए हैं. वहीं, लोकसभा
चुनाव में बीजेपी जिस तरह से अपना ग्राफ बढ़ाने में कामयाब रही है और
कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है. इससे
बीजेपी के हौसले बुलंद हो गए हैं.
रेड्डी समुदाय पर नजर
तेलंगाना में बीजेपी की नजर कांग्रेस और टीडीपी के ऐसे
नेताओं पर है जो अपनी-अपनी पार्टी से नाखुश हैं. इसके अलावा बीजेपी यहां
कांग्रेस के रेड्डी समुदाय को साधने के साथ-साथ दलित और अन्य पिछड़ी जाति
के वोटों को जोड़ने पर लगी है. ऐसे में बीजेपी को लगता है कि तेलंगाना में
केसीआर के मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के विरोध से हिंदू वोटबैंक को उसके
पक्ष में लामबंद हो सकता है.
आंध्र प्रदेश में टीडीपी का विकल्प बनने की जुगत में
लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश की 25 में 22 सीटें जगन
मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस और तीन सीटें टीडीपी जीतने में
कामयाब रही है. इसी तरह विधानसभा चुनाव में कुल175 सीटों में से 151
वाईएसआर कांग्रेस, 23 टीडीपी और एक सीट अन्य को मिली है. कांग्रेस और
बीजेपी दोनों राष्ट्री पार्टियों को एक भी सीट नहीं मिली है.कांग्रेस का
सारा राजनीतिक आधार वाईएसआर कांग्रेस में शिफ्ट हो गया है. ऐसे में बीजेपी
आंध्र प्रदेश में टीडीपी की जगह लेने की जुगत में है.
बीजेपी की नजर टीडीपी के उन बड़े नेताओं पर है जो
चंद्रबाबू नायडू से नाराज हैं. टीडीपी में कई नेता ऐसे हैं जो यह मानते हैं
कि चंद्रबाबू नायडू की राजनीतिक गलतियों की वजह से ही टीडीपी की शर्मनाक
हार का मुंह देखना पड़ा है. इसके अलावा कई नेता मानते हैं कि चंद्रबाबू ने
एनडीए से बाहर आकर सबसे बड़ी गलती की. मौके की नजाकत को समझते हुए बीजेपी ने
टीडीपी के मजबूत नेताओं को अपने साथ मिलाने में जुटी है. टीडीपी के
महासचिव और पूर्व मंत्री ई पेद्दी रेड्डी बीजेपी में शामिल होने जा रहे
हैं.
2024 पर बीजेपी की नजर
आंध्र प्रदेश में बीजेपी को मजबूत करने और 2024 के
लोकसभा और विधानसभा चुनाव तक पार्टी को मुख्य मुकाबले में खड़े करने की
जिम्मेदारी राम माधव और सह-प्रभारी सुनील देवधर के अलावा जेवीएल नरसिम्हा
राव के कंधों पर है. इन तीन नेताओं की तिकड़ी बीजेपी के इस प्लान को जमीन
पर उतारने में जुट गई है. बीजेपी की प्रदेश में प्राथमिकता कापू जाति पर
पकड़ रखने वाले नेताओं पर है.
कापू समुदाय पर बीजेपी डाल रही डोरे
आंध्र प्रदेश में कापू जाति की आबादी करीब 18 फीसदी है और इनकी रेड्डी समुदाय से राजनीतिक प्रतिद्वंदिता जगजाहिर है. रेड्डी समुदाय एक समय कांग्रेस का मजबूत वोटबैंक माना जाता था जो अब वाईएसआर कांग्रेस के साथ जुड़ गया है. जबकि कापू समुदाय टीडीपी का मूल वोटबैंक है. इसलिए बीजेपी कापू समुदाय के नेताओं को अपने साथ मिलाने में जुटी है. लोकसभा चुनाव से ऐन पहले बीजेपी ने कांग्रेस छोड़ने वाले कापू जाति के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री कन्ना लक्ष्मी नारायण को पार्टी की आंध्र प्रदेश अध्यक्ष बनाया.
पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर राजभवन में राज्यपाल राम नाईक से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
जेएनएन, लखनऊ। पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी
के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को
लेकर राजभवन में राज्यपाल राम नाईक से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान अखिलेश के साथ सपा के वरिष्ठ नेता अहमद हसन भी मौजूद रहे। अखिलेश
ने मुलाकात के दौरान प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई। मुख्यमंत्री
के पद से हटने के बाद अखिलेश यादव पहली बार राजभवन पहुंचे थे।
राजभवन में राज्यपाल राम नाईक से मुलाकात के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और अपराध कर रहे हैं। इन पर लगाम लगनी चाहिए। प्रदेश में बेटियों के साथ ऐसे जघन्य अपराध नहीं हुए होंगे लेकिन, भारतीय जनता पार्टी की सरकार में लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं और सरकार हाथ पर हाथ रखकर बैठी हुई है। मैंने राज्यपाल के माध्यम से सरकार से मांग की है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जंगलराज जैसे हालात हो गए हैं। लखनऊ
में बैठकें हो रहीं हैं, जिलों में हत्याओं पर हत्याएं हो रही हैं। गौरतलब
है कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश यादव की आगरा कोर्ट परिसर
में हत्या के बाद से प्रदेश की सियासत गरमा गई है। उत्तर प्रदेश में
बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश यादव कई दिनों से लगातार प्रदेश
सरकार पर हमलावर हैं। पिछले दिनों बयान जारी कर उत्तर प्रदेश में बेतहाशा
बढ़े अपराधों और मंत्रियों की बयानबाजी पर योगी सरकार को घेरते हुए अखिलेश
यादव ने आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी दुनिया भर में उत्तर प्रदेश
की बदनामी कराने में लगी है।
आगरा में उप्र बार कौंसिल की अध्यक्ष दरवेश सिंह की हत्या के बाद एटा
स्थित उनके पैतृक गांव में श्रद्धांजलि देने के पहुंचे अखिलेश ने पत्रकारों
से बातचीत के दौरान भी कहा था कि कानून व्यवस्था पर प्रदेश सरकार का ध्यान
नहीं है। पता नहीं चल रहा है कि सरकार किस दिशा में जा रही है।
मुख्यमंत्री जब भी अफसरों के साथ समीक्षा बैठक करते हैं, अपराधी कोई बड़ी
वारदात कर चुनौती दे देते हैं। अखिलेश ने सीएम की समीक्षा बैठकों के दौरान
हुईं कुछ घटनाओं का उदाहरण भी दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी खुद अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर
चुके हैं. सूत्रों की मानें तो उन्होंने यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के
सामने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन इस पर 25 मई को होने वाली
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में चर्चा होगी.
लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक
जीत के बाद कांग्रेस की किरकिरी हो रही है. 2014 में 44 सीट और अब 52 सीट
मिलने के बाद कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठने लग गए हैं. मशहूर इतिहासकार और
बीते पांच साल में कई बार मोदी सरकार पर सवाल उठाने वाले रामचंद्र गुहा ने
भी अब राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रामचंद्र गुहा ने
लिखा, ‘वह हैरान हैं कि अभी तक राहुल ने इस्तीफा नहीं दिया है’.
रामचंद्र गुहा ने अपने ट्विटर पर लिखा, ‘वह हैरान हैं कि अभी तक राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा नहीं दिया है. उनकी पार्टी ने इस चुनाव में काफी बुरा प्रदर्शन किया है. वह अपनी खुद की सीट ही हार चुके हैं.’
रामचंद्र गुहा ने आगे लिखा, ‘राहुल गांधी ने अपना
आत्मसम्मान, राजनीतिक कद दोनों ही गंवा दिया है. मैं मांग करता हूं कि
कांग्रेस को अब एक नए नेतृत्व की जरूरत है. लेकिन कांग्रेस के पास वह भी
नहीं है’.
बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी खुद अपने
पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर चुके हैं. सूत्रों की मानें तो वे यूपीए
चेयरपर्सन सोनिया गांधी के सामने इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं, लेकिन इस
पर 25 मई को होने वाली कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में चर्चा होगी.
रामचंद्र गुहा की गिनती बीते पांच साल में मोदी सरकार
के मुखर आलोचकों में होती है, ऐसे में उनकी ओर से इस बार कांग्रेस को ही
कोसा गया है. इस शर्मनाक हार पर कांग्रेस की हर ओर आलोचना हो रही है, तो
वहीं पार्टी में इस्तीफे का दौर भी शुरू हो गया है.
राहुल गांधी अपनी अमेठी सीट भी गंवा चुके हैं, जिसके बाद अमेठी जिले के अध्यक्ष ने इस्तीफा सौंप दिया है. यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने भी अपने पद से इस्तीफा भेज दिया है. बीजेपी इस बार अकेले दम पर 303 तो वहीं एनडीए ने 353 का आंकड़ा छुआ है. कांग्रेस सिर्फ 52 और यूपीए 90 के आसपास ही सिमट गया है.
सिद्धार्थनगर
जिले की डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र की मतगणना कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हो
गई है। यहां पर कुल पांच विधान सभा क्षेत्र हैं।
गोरखपुर, जेएनएन। सिद्धार्थनगर जिले की
डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र की मतगणना में भाजपा आगे चल रही है। पाचवें चक्र
में भाजपा के जगदम्बिका पाल आगे चल रहे हैं। भाजपा को 239382 मत मिले हैं।
दूसरे नंबर पर बसपा के आफताब आलम को 193984 मत मिले हैं।
यहां पर भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी में कड़ा मुकाबला है। भाजपा से सांसद
जगदंबिका पाल प्रत्याशी हैं तो गठबंधन से आफताब आलम और कांग्रेस से डा.
चंद्रेश उपाध्याय हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में पांच विधान सभा क्षेत्र हैं।
इसमें कुल 1761317 मतदाता हैं। इसमें से मात्र 935004 मतदाताओं ने अपने
मताधिकार का प्रयोग किया। इस तरह यहां पर कुल 53.09 फीसद मतदान हुआ।
डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र में कुल 1959 मतदेय स्थल बनाए गए थे।
वर्ष 2014 में रही यह स्थिति
वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा ने जगदंबिका पाल को उम्मीदवार बनाया था।
वह 298845 मत पाकर विजयी घोषित किए गए थे। जबकि बसपा ने मोहम्मद मुकीम को
प्रत्याशी बनाया था। उन्हें 195257 वोट पाकर पराजय का मुह देखना पड़ा। सपा
प्रत्याशी के रूप में माता प्रसाद पाडेय को 174778 मत प्राप्त हुए थे। जबकि
पीसपार्टी के अध्यक्ष डा. मोहम्मद अय्यूब को 99242 मत प्राप्त हुए थे।
कांग्रेस की वसुंधरा को 88117 मत मिले थे और 6775 लोगों ने नोटा का प्रयोग
किया था।
उल्लेखनीय है कि डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधान सभा
क्षेत्र पड़ता है। इसमें शोहरतगढ़ विधान सभा क्षेत्र, कपिलवस्तु विधान सभा
क्षेत्र, इटवा विधान सभा क्षेत्र, बांसी विधान सभा क्षेत्र, डुमरियागंज
विधान सभा क्षेत्र शामिल हैं। उक्त सभी विधान सभा क्षेत्रों में भाजपा एवं
उसके सहयोगी दल के विधायक हैं। इसमें शोरहगढ़ विधान सभा क्षेत्र के विधायक
भाजपा के सहयोगी दल के हैं। पांचों विधान सभा क्षेत्र में भाजपा की स्थिति
को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि उन्होंने अपनी जबरदस्त तैयारी की हुई
है। बूथवार लोगों को लगाया गया है।
नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के तहत देशभर में 542 संसदीय सीटों हुए मतदान की गिनती गुरुवार को सुबह आठ बजे शुरू हुई।2019 का लोकसभा चुनाव सात चरणों में लड़ा गया। 11 अप्रैल को पहले चरण के लिए वोट डाले गए तो 19 मई को आखिरी चरण का मतदान हुआ। पहले चरण में 91, दूसरे में 97, तीसरे में 117, चौथे में 71, पांचवें में 51 और छठे-सातवें में 59-59 सीटों पर वोट डाले गए। 543 सीटों में से कुल 542 सीटों पर ही मतदान हो पाया था, तमिलनाडु की वेल्लोर सीट पर सुरक्षा कारणों की वजह से मतदान टाला गया था।
लोकसभा चुनाव अपने अंतिम पड़ाव पर
पहुंच चुका है. रविवार को आख़िरी और सातवें चरण के मतदान के बाद अब सभी
मतदाताओं ने नेताओं की चुनावी किस्मत को बैलेट बॉक्स और ईवीएम में बंद कर
दिया है.
23 मई को जनता का जनादेश देश के सामने आएगा लेकिन आख़िरी
चरण के मतदान और नतीजों की तारीख़ के बीच एक और दिन सामने आता है और वो है
एग्ज़िट पोल का दिन.
मतदान के आख़िरी दिन वोटिंग की प्रक्रिया ख़त्म होने के आधे घंटे के भीतर तमाम न्यूज़ चैनलों पर एग्ज़िट पोल दिखाए जाने लगते हैं.
दरअसल, ये एग्ज़िट पोल आने वाले चुनावी नतीजों का एक अनुमान होता है और
बताता है कि मतदाताओं का रुझान किस पार्टी या गठगबंधन की ओर जा सकता है.
न्यूज़ चैनल तमाम सर्वे एजेसियों के साथ मिलकर ये कराते हैं.
ये सर्वे कई बार नतीजों से बिल्कुल मेल खाते हैं तो कभी उनके उलट होते हैं. ऐसे में हमने एग्ज़िट पोल की पूरी प्रक्रिया समझने की कोशिश की.
सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार कहते हैं कि एग्ज़िट पोल को लेकर जो
धारणा है वो है ये कि मतदाता जो वोट देकर पोलिंग बूथ से बाहर निकलते हैं
उनसे बात की जाती है.
सर्वे में कई सवाल मतदाता से पूछे जाते हैं
लेकिन उनमें सबसे अहम सवाल होता है कि आपने वोट किसे दिया है. हज़ारों
वोटर्स से इंटरव्यू करके आंकड़े जुटाए जाते हैं, इन आंकड़ों का विश्लेषण
करके ये वोटिंग का अनुमान निकालते हैं यानी ये पता लगाते हैं कि इस पार्टी
को कितने प्रतिशत वोटरों ने वोट किया है.
एग्ज़िट पोल करने, आंकड़े जुटाने और उन आंकड़ों को आप तक ले आने में एक लंबी मेहनत और प्रक्रिया होती है.
ऐसा नहीं है कि हर बार एग्ज़िट पोल सही ही साबित हुए हैं. इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव.
2015
में हुए बिहार विधानसभा चुनावों के बाद एग्ज़िट पोल में भाजपा के बंपर जीत
का अनुमान लगाया गया था. पोलिंग एजेंसी चाणक्य ने भाजपा को 155 और
महागठबंधन को महज 83 सीटों पर जीत की भविष्यवाणी की थी.
वहीं नीलसन और सिसरो ने 100 सीटों पर भाजपा की जीत का अनुमान लगाया था लेकिन नतीजे बिल्कुल विपरीत रहे थे.
जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के महागठबंधन ने कुल 243 सीटों में से 178 पर जीत हासिल की थी.
यह बड़ी जीत थी और एग्ज़िट पोल और असल नतीजों में काफ़ी अंतर देखने को मिला था.
आख़िर
एग्ज़िट पोल बड़े स्तर गलत कैसे हो जाते हैं? इस सवाल पर संजय कहते हैं,
”एग्ज़िट पोल के फ़ेल होने का सबसे बेहतर उदाहरण है 2004 का लोकसभा चुनाव.
इस चुनाव में एग्ज़िट पोल के आंकड़े ग़लत साबित हुए. एग्ज़िट पोल में कहा
जा रहा था कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी और एनडीए सबसे बड़ा गठबंधन
बनकर उभरेगा, लेकिन नतीजे हम सबको पता हैं. कांग्रेस की सीटें अधिक आईं और
यूपीए सबसे बड़ा गठबंधन साबित बना.”
2015 के बिहार चुनाव में ज़्यादातर एग़्ज़िट पोल के अनुमान ग़लत हुए थे.
”आप देखेंगे कि ज़्यादातर वहीं एग्ज़िट पोल फ़ेल हुए हैं जिनमें बीजेपी की जीत का अनुमान लगाया जाता है. एग्ज़िट पोल में हम पोलिंग बूथ से निकल कर बाहर आए मतदाताओं से बात करते हैं. ऐसे में जो मतदाता मुखर होता है वो ज़्यादा बातें करता है.”
‘आप देखेंगे कि बीजेपी का मतदाता ज़्यादातर शहरी, ऊंचे तबके का,
पढ़ा-लिखा, युवा होता हैं. आप देखेंगे कि सोशल कॉन्फ़िडेंस वाले लोग खुद
आकर अपनी बात रखते हैं. वहीं गरीब, अनपढ़ और कम अत्मविश्वास वाला मतदाता
चुपचाप वोट देकर चला जाता है. उसका सर्वे करने वालों तक खुद जाने की
संभावना कम होती है ऐसे में सर्वे करने वालों को ये ख्याल रखना ज़रूरी होता
है कि वह हर तबके के मतदाताओं से बात करे.”
मतदान को गुप्तदान कहा
जाता है, ऐसे में मतदाताओं से ये जान पाना कि वो किसे वोट देंगे ये भी एक
चुनौती होती है. कई बार वो सच बता रहे हैं या नहीं इस पर भी संशय होता है.
लेकिन
संजय इससे इत्तेफ़ाक नहीं रखते वो कहते हैं कि ज़्यादातर मतदाता सच बोलते
हैं. ये हो सकता है कि कोई मतदाता झूठ बोल दे, मज़ाक कर दे लेकिन मैं नहीं
मानता कि जब किसी वोटर हम जाकर बात करते हैं तो उसे झूठ बोलने में कोई आनंद
आता है. मतदाता ने सच बोला या झूठ इसका फ़ैसला चुनाव नतीजों के बाद साफ़
हो जाता है. अगर आप पिछले 10-15 सालों के एग्ज़िट पोल को देखेंगे तो
करीब-करीब सभी एग्ज़िट पोल के अनुमान नतीजों के आगे-पीछे ही आए.
सही साबित हुए एग्ज़िट पोल
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में दिसंबर 2018 में चुनाव नतीजे आए. तीनों राज्यों में कांग्रेस ने सरकार बनाई.
तीन
प्रमुख न्यूज़ चैनल्स- ‘इंडिया टुडे-आज तक’, रिपब्लिक टीवी और एबीपी के
अपने-अपने एग्जिट पोल में कांग्रेस को मध्य प्रदेश में जीतता दिखाया गया .
इन तीनों न्यूज़ चैनल्स ने क्रमश: एक्सिस इंडिया, सी-वोटर और सीएसडीएस से अपने अपने सर्वेक्षण कराए.
छत्तीसगढ़ के एग्ज़िट पोल के आकलन उलझे हुए दिखाए गए. ज़्यादातर चैनलों
के एग्ज़िट पोल मान रहे थे कि चुनाव नतीजे से छत्तीसगढ़ में त्रिशंकु
विधानसभा की स्थिति सामने आएगी.
सिर्फ़ एबीपी न्यूज़ और इंडिया टीवी के सर्वेक्षण बता रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में भाजपा लगातार चौथी बार सत्ता में आएगी और उसे कामचलाऊ बहुमत मिल जाएगा.
पर ‘इंडिया टुडे-आज तक’ और ‘रिपब्लिक टीवी’ जैसे चैनल छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की बढ़त की भविष्यवाणी की थी.
2017 गुजरात विधानसभा चुनाव में भी नतीजे एग्ज़िट पोल
के रुझान एक जैसे ही थे. हालांकि कांग्रेस और बीजेपी की सीटों का अंतर बेहद
कम था लेकिन राज्य में बीजेपी की ही सरकार बनी.
इंडिया
न्यूज़-सीएनएक्स के एग्ज़िट पोल में गुजरात में भाजपा को 110 से 120 और
कांग्रेस को 65-75 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था.
टाइम्स नाऊ-वीएमआर के एग्ज़िट पोल में भाजपा को 115 और कांग्रेस को 65 सीटें मिलती दिखाई गईं.
न्यूज़ 18-सीवोटर के एग्ज़िट पोल में भाजपा को 108 और कांग्रेस को 74 सीटें का अनुमान लगाया गया.
इंडिया टुडे-माय एक्सिस ने भाजपा को 99 से 113 और कांग्रेस को 68 से 82 सीटों का अनुमान दिया.
न्यूज़ 24- चाणक्य ने भाजपा को 135 और कांग्रेस को 47 सीटों का अनुमान जताया.
साल 2016 में पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए थे. इस चुनाव के असल नतीजे एग्ज़िट पोल के काफ़ी क़रीब रहे थे.
चाणक्य
के एग्ज़िट पोल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के 210 सीटों पर जीत
के अनुमान लगाए थे. वहीं इंडिया टुडे-एक्सिस ने यह संख्या 243 बताई थी.
ये
सारे अनुमान सरकार बनाने के जादुई आंकड़ों से अधिक थे और कमोबेश ये सही भी
साबित हुए. ममता बनर्जी की पार्टी ने 211 सीटों पर जीत हासिल की थी.
हालांकि
सारे अनुमान दूसरे नंबर पर रही पार्टी के मामले में ग़लत साबित हुए.
एग्ज़िट पोल्स यह सटीक अनुमान नहीं लगा पाए कि उपविजेता कितनी सीटें
जीतेगा.
इंडिया टुडे-एक्सिस को छोड़कर सभी एग्ज़िट पोल लेफ़्ट और
कांग्रेस को 100 से अधिक सीट दे रहे थे, लेकिन असल नतीजों में लेफ़्ट और
कांग्रेस को महज़ 44 सीटें मिली थीं.
साल 2017 में उत्तर प्रदेश में
हुए विधानसभा चुनावों के बाद लगभग सभी एग्ज़िट पोल में भाजपा की जीत के
प्रबल अनुमान लगाए गए थे. और नतीजे भी ऐसे ही रहे.
बड़ी पार्टी कोई और सरकार किसी और की
कर्नाटक
में हुए विधानसभा चुनावों के असल परिणाम के कुछ महीने पहले कई राजनीतिक
वैज्ञानिकों ने तर्क दिया था कि विजेता की भविष्यवाणी के हिसाब से यह चुनाव
सबसे कठिन था.
एबीपी-सी वोटर ने 110 सीटों पर भाजपा के जीत के अनुमान लगाए थे, वहीं 88 सीटों पर कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी की गई थी.
दूसरी तरफ इंडिया टुडे-एक्सिस के एग्ज़िट पोल में 85 पर भाजपा और 111 सीटों पर जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के जीत के अनुमान लगाए गए थे.
हालांकि
चुनावों के असल परिणाम अलग रहे. इसमें भाजपा को उम्मीद से अधिक सफलता मिली
थी. भाजपा 100 से ज़्यादा सीटों पर जीत का परचम लहराने में कामयाब रही थी,
हालांकि वो सरकार नहीं बना पाई.
चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी.
प्रत्येक चुनाव परिणाम का सटीक अनुमान लगाना बेहद मुश्किल होता है.
संजय
कुमार मानते हैं कि कभी कभी एग्ज़िट पोल ग़लत होते हैं लेकिन इन्हें ऐसे
समझना चाहिए कि अगर नतीजों में एग्जिट पोल की सीटें सटीक नहीं आईं लेकिन
रुझान उसी ओर आया तो उसे ग़लत नहीं कहना चाहिए बल्कि वह भी सही एग्ज़िट पोल
ही होता है.