ओमान पाकिस्तानी बलूचों को नौकरी क्यों नहीं दे रहा

“मैंने अपनी ज़िन्दगी के पाँच साल इस इंतज़ार में गुज़ारे हैं कि कहीं से मेरी नौकरी को लेकर कोई जवाब आएगा. लेकिन अब तक किसी ने कुछ भी नहीं बताया है और ऐसा महसूस कराया जा रहा है जैसे मैं कुछ ग़लत करने जा रहा हूं.”

25 साल के गहराम बलोच का ये बयान ओमानी फ़ौज में भर्ती होने के लिए इंटरव्यू को लेकर है. वो 330 से ज़्यादा के क़रीब बलूच नौजवानों में से एक हैं जो नौकरी के लिए इंटरव्यू के पाँच साल बाद भी जवाब के इंतज़ार में हैं.

एक पाकिस्तानी शहरी का एक दूसरे देश की फ़ौज में भर्ती का ख़्वाहिशमंद होना शायद आपको अजीब लगे लेकिन पाकिस्तान के सूबे बलूचिस्तान के तटीय क्षेत्र ग्वादर के लोगों के लिए खाड़ी देश ओमान में नौकरी की ख़्वाहिश कोई अजीब चीज़ नहीं है.

बलूचिस्तान से ओमान जाने वालों में बड़ी संख्या छात्रों और मेहनतकशों की रही है. हालांकि पिछले कुछ सालों में ये प्रक्रिया अपने अंत तक पहुंचती नज़र आ रही है.

ओमानी अधिकारियों की तरफ़ से बलूच नौजवानों की अपनी फ़ौज में आख़िरी बाक़ायदा भर्ती तो 1999 में की गई थी जबकि उसके बाद 2014 में जिन लोगों के इंटरव्यू लिए गए उन्हें आज तक जवाब नहीं दिया गया.

इस बारे में वर्ल्ड बैंक की अप्रैल 2019 में प्रकाशित होने वाली रिपोर्ट के मुताबिक़, खाड़ी देशों में दक्षिणी एशिया से मज़दूरों के जाने की प्रक्रिया बहुत हद तक कम हो गई है.

इन देशों में ओमान का नाम भी लिया गया है जहां रिपोर्ट के मुताबिक़ मेहनतकशों की भर्तियों की प्रक्रिया में कमी की एक वजह वहां पर होने वाली ‘ओमानाइज़ेशन’ है, जिसका मतलब किसी भी तरह की भर्तियां करते वक़्त अपने शहरियों को तरजीह देना है. Image caption पाकिस्तान और ओमान के बीच समझौते में यह तय किया गया था कि बलूच के लोगों को ओमान फ़ौज में भर्ती किया जाएगा

ओमान और ग्वादर के संबंधों का इतिहास

बलूचिस्तान और ओमान सल्तनत के संबंध ख़ासे पुराने हैं. एक अनुमान के मुताबिक़, मकरानी बलूच ओमान की आबादी का 25 फ़ीसद हिस्सा हैं और इन्हें वहां अलबलूशी पुकारा जाता है.

1908 में प्रकाशित होने वाली किताब ‘गजेटियर ऑफ़ परशियन गल्फ़, ओमान एंड सेन्ट्रल अरबिया’ अरब और फ़ारस की खाड़ी में काम करने वाले ब्रिटिश दूतावास के कर्मचारियों के लिए इलाक़े के बारे में जानकारी के लिए ख़ासा महत्वपूर्ण समझा जाता था.

इसके लेखक जॉन लारिमर के मुताबिक़ 18वीं सदी में ख़ान ऑफ़ क़लात नूरी नसीर ख़ान के दौर में ओमान के एक शहज़ादे ‘बाहोट’ बनकर यानी पनाह की तलाश में इनके पास आए थे.

शहज़ादे ने अपनी सल्तनत वापस हासिल करने के लिए बलूचिस्तान से मदद की गुज़ारिश की थी लेकिन नूरी नसीर ख़ान इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते थे.

बीबीसी से बात करते हुए शोधकर्ता और प्रोफ़ेसर हफ़ीज़ जमाली का कहना था, “ख़ान ऑफ़ क़लात ने उस वक़्त ग्वादर के बंदरगाह जो तब महत्वहीन था उनको तोहफ़े के तौर पर दे दिया ताकि इससे होने वाली आमदनी से वो अपना गुज़ारा कर सकें. फिर ग्वादर बाक़ायदा तौर पर ओमानी सल्तनत का हिस्सा बन गया.”

हालांकि बलोच राष्ट्रवादी इस बयान को नहीं मानते और उनका मानना है कि ओमानी शहज़ादे को ग्वादर अस्थायी तौर पर उनकी हिफ़ाज़त के लिए दिया गया था और उन लोगों को ग्वादर पर पूरा हक़ हासिल नहीं था.

बलूचिस्तान के तटीय इलाक़े ग्वादर को देखा जाए तो वहां आज भी ओमानी दौर के क़िले सदियों पुराने शाही बाज़ार में नज़र आते हैं. ये ग्वादर के एक दौर की तस्वीर पेश करते हैं जब सरहदें सिर्फ़ एक लकीर समझी जाती थीं और सफ़र दुश्वार होने के बावजूद लोग काम की वजह से विभिन्न देशों में आते-जाते रहते थे.

गहराम बलोच के ख़ानदान से संबंध रखने वाले कई लोग भी ऐसे ही ज़माने में वहां चले गए थे जब ओमानी फ़ौज में काम करने के कारण ओमान की नागरिकता मिलना ख़ासा आसान था.

प्रोफ़ेसर हफ़ीज़ जमाली ने जॉन लारिमर की लिखी हुई बात दोहराते हुए कहा कि ‘जब ओमानी सल्तनत का फैलाव हुआ यानी जब ओमान ने अफ़्रीका और भारत के समुद्र तक अपना क़ब्ज़ा जमाया तो मकरान के बलोच बतौर सिपाही ओमान के फैलाव में एक अहम किरदार निभाते हुए उभरे.’

ओमानी फ़ौज में बलोच सिपाही

जब 1947 के बाद भारत और पाकिस्तान दो आज़ाद देश बने तो पाकिस्तान सरकार ने ओमान की सल्तनत से ग्वादर को अपनी ज़मीन से नज़दीक होने की बुनियाद पर ख़रीदने की बात की. यह अनुबंध सन् 1958 में तय पाया जिसके तहत पाकिस्तान ने ओमान से ग्वादर 84 लाख डॉलर में ख़रीद लिया.

इस अनुबंध में यह भी तय किया गया था कि बलूचिस्तान के लोगों को ओमानी फ़ौज में भर्ती किया जाएगा. इस नियम पर अमल भी हुआ लेकिन 1958 के बाद नियम सिर्फ़ नियम भर रह गया.

इसकी वजह प्रोफ़ेसर हफ़ीज़ जमाली ने बताई, “ओमानी सल्तनत पहले जिन लोगों को भर्ती करती थी वो आस-पास के इलाक़ों को जीतने के इरादे से करती थी जिसमें उन्हें प्रशासन संभालने के लिए लोगों की ज़रूरत पड़ती थी. 1958 के बाद तो ओमानी सल्तनत ख़ुद खाड़ी द्वीप तक सीमित रह गई तो अफ़्रीक़ी इलाक़े मुमबासा और ज़ेनजीबार जहां बलोच सिपाहियों ने जाकर ओमानियों की तरफ़ से व्यवस्था संभाली वो इनसे अलग हो गए क्योंकि उस समय दुनिया भर में तब्दीलियां आई थीं.”

इस स्थिति में ओमान को बलोच सिपाहियों की ज़रूरत नहीं रही लेकिन प्रतीकात्मक बुनियादों पर कम संख्या में भर्तियां जारी रहीं.

हफ़ीज़ जमाली ने बताया, “उस दौरान बलोच सिपाहियों की एक ख़ास तादाद की ज़रूरत उस समय पेश आई थी जब 1970 के दशक में ओमान में स्थानीय बग़ावत हुई थी. इस बग़ावत से निपटने के लिए लोगों की भर्तियां करनी पड़ी थीं लेकिन ये वक़्ती भर्तियां थीं जो इस मसले के हल के बाद ख़त्म हो गई थीं.”

बलूचिस्तान का विद्रोह और ओमान में नौकरियां

जब 1970 के दशक में तेल की खोज हुई और तो ग्वादर और मकरान के लोगों की दिलचस्पी ओमान जाने में और बढ़ गई. इस पर ओमाम की तरफ़ से प्रतिबंध लगाई गई कि अब नए लोगों को नागरिकता नहीं दी जाएगी.

प्रतीकात्मक बुनियादों पर ओमानी फ़ौज में भर्तियां बहुत हद तक कम होने की एक वजह बलूचिस्तान में विद्रोह से जुड़ी है.

बलूचिस्तान के इलाक़े कैच में ओमानी फ़ौज में भर्ती होने के लिए आस लगाए बैठे लोगों में बलिख शेर भी हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया कि ‘इंटरव्यू के दौरान मुझ से सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि अगर हम आपको ओमान जाने देते हैं तो क्या आप वहां पर ली गई फौजी ट्रेनिंग पाकिस्तान के ख़िलाफ़ इस्तेमाल तो नहीं करेंगे?’

बलिख शेर का कहना था कि ‘मेरे पास इस बात का जवाब नहीं था, सिवाए हैरानी ज़ाहिर करने के क्योंकि मैं सिर्फ़ नौकरी के लिए वहां जाना चाहता हूं. मुझे इंटरव्यू से ज़्यादा तफ़्तीश लग रही थी. अब मैं ज़्यादा ख़ौफ़ज़दा हूं.’

शोधकर्ताओं का मानना है कि कहीं न कहीं ये शक हर देश में पाया जाता है. शोधकर्ता अमीम लुत्फ़ी की रिसर्च ओमानी बलोच और खाड़ी देशों में उनके रिहाइश के गिर्द घूमती है.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ‘इसकी वजह दुबई, शारजा, मस्कट और बहरैन में चंद ऐसी जगहें हैं जो अलगाववादी सोच रखने वाले लोगों के गढ़ कहलाते हैं.’

अमीम का कहना था कि ‘इनमें से जो गिरोह ईरान विरोधी हैं उनका खाड़ी देश भी साथ देते हैं लेकिन साथ ही इस बात का भी ख़ास ख्याल रखते हैं कि पाकिस्तान विरोधी प्रोपेगंडा को पनपने न दें.’

इसकी एक और वजह फ़ौजी फाउंडेशन का भर्तियों के मामले में पेश होना है. सन् 2010 में फ़ौजी फाउंडेशन के विदेशों में भर्तियों के लिए एक फ़र्म बनाई थी ताकि बलूचिस्तान और अन्य इलाक़ों के बेशुमार लोग निजी संबंध के बजाए इनके ज़रिए बाहर जाएं.

लेकिन अमीम के मुताबिक़ ‘इस अमल का मक़सद विदेशी फ़ौज में भर्तियों को ख़त्म करना था जो बहुत हद तक हो चुका है.’

जानकारों के मुताबिक़ इस समय दुनिया भर में मॉडर्न मिलिट्राइज़ेशन का रूझान देखने में आ रहा है जिसके नतीजे में खाड़ी देशों और ख़ासकर ओमान ऐसे लोगों को भर्ती करना चाह रहा है जो सही तरीक़े से प्रशिक्षित हो वर्ना वो अपने लोगों पर संतोष करना चाहता है.

हम जहां हैं, वहीं ठीक हैं’

ओमान के शहर मस्कट के देशी इलाक़े वादिये हतात में ज़्यादातर आबादी तिरबत और ग्वादर से आने वाले लोगों की है.

गहराम और बलिख शेर के ज़्यादातर रिश्तेदार इसी इलाक़े से संबंध रखते हैं लेकिन अब गहराम ओमान जाने के बारे में उम्मीद नहीं रखते. अब वो बच्चों को पढ़ाकर अपना गुज़ारा करना चाहते हैं.

इनके मुताबिक़ ‘दूसरे देश की फौज में भर्ती होकर मैं अपने देश में रहने वाले अपने मां-बाप और रिश्तेदारों को रूस्वा नहीं करना चाहता. मैं इसके लिए तैयार नहीं हूं. मैं जहां हूं, वहीं ठीक हूं.’

इधर बलिख शेर का कहना था कि ‘हम दुनिया के किसी भी मुल्क चले जाएं हमें शक की निगाह से ही देखा जाता है. इसकी एक वजह हमारे देश का हमारे ख़िलाफ़ पक्षपाती रवैया है.’

Dubai set to become innovation hub; woos Indian entrepreneurs

Selected startups will get business licences and office set-up in Dubai

Looking to transform itself into an innovation hub, Dubai is wooing entrepreneurs from India, the third biggest startup base in the world, to set up shops in the emirate.

The focus is on technology-driven startups, wherein the authorities are offering easier business licences, office spaces and access to funding.

Dubai grew to prominence first as a trading hub, and then as a construction, tourism and manufacturing centre. However, it grew at 1.9 per cent in 2018, the slowest growth since the post-crisis time in 2010.

“When we decided to launch the programme of attracting overseas startups here, naturally the first choice was India, as 30 per cent co-founders of our Dubai Startup Hub have Indian origin,” Natalia Sycheva, manager, entrepreneurship department of Dubai Chamber of Commerce said.

“We have a strong focus on India and we realise how our incubators will benefit from Indian talent,” she said, adding that the chamber has launched Dubai Startup Hub to attract startups here.

“We would like to have around a couple of hundreds of startups, to bring their businesses to Dubai,” she added.

They are looking at companies in emerging technologies like blockchain, artificial intelligence and digital transformations, with a focus on how their solutions can be applied to help the local economy, she said.

These startups should bring changes in e-commerce, constction, logistics and retail sectors, she said.

The hub organised roadshows at the Indian startup capital of Bengaluru and Delhi last month to identify and attract high-potential startups from India.

Selected startups will get business licences and an office set-up in Dubai as well as assistance in getting access to various government or private sector funding, she said.

Sycheva added that efforts are also on to get startups from different African countries.

The chamber feels that there is a lot of potential for the growth of trade between India and the United Arab Emirates (UAE).

“India is Dubai’s second-largest trading partner with $31.4 billion worth of bilateral non-oil trade in 2018, a 17 per cent increase compared to the previous year. But we see a lot of opportunity in the increase of this figure in coming future,” she said.

The local government is expecting approximately 1.5 per cent of the UAE’s annual forecast of the gross domestic product (GDP) during the six months of the Dubai Expo 2020 to be held next year, Jon Bramley, vice president, communication of the Dubai Expo 2020 said.

He said India is participating in a big way at the Expo, which will feature 192 individual country pavilions in 4.38 square km area.

The World Expo is one of the world’s oldest and largest international events, taking place every five years and lasting for six months, which serve as a bridge between governments, companies, international organisations and citizens.

Budget likely to hike spending to combat falling growth rate

Fiscal deficit target expected to rise from February’s 3.4 per cent of GDP

Prime Minister Narendra Modi’s government on Friday will unveil a budget that is expected to cut taxes on business and raise spending in a bid to shore up consumption and faltering economic growth.

Analysts say Modi, boosted by a sweeping election victory, hopes to use the budget to restart reforms and deal with a series of economic woes.

In January-March, annual growth slumped to 5.8 per cent, the slowest pace in 20 quarters. Growth for the financial year that ended in March was 6.8 per cent, also a five-year low, and indicators such as plummeting industrial output and automobile sales have stoked fears of a deeper slowdown.

A shortfall in monsoon rains, pivotal for the farm sector that employs nearly half of India’s workers, has increased concerns of rural distress and strengthened the case for intervention, a leader of Modi’s ruling Bharatiya Janata Party (BJP) said.

“The focus of the budget will be to boost domestic consumption, address the rural crisis and support small manufacturers,” Gopal Krishna Agarwal, BJP’s economic affairs spokesman, told Reuters.

Shilan Shah at Capital Economics in Singapore said in a note ”Given the recent economic slowdown, the finance minister is likely to announce more accommodative tax and spending measures.”

In February, then-Finance Minister Piyush Goyal presented an interim budget for the year beginning April 1, to maintain government functions while a weeks-long election was under way.

Big investment plans

On Friday, new minister Nirmala Sitharaman will present a full-year budget that Agarwal said could lower corporate taxes for small and medium-sized businesses as well as personal ones to revive consumption by the middle class that gave Modi a second term, while withdrawing some tax exemptions.

In 2018, the government reduced the corporate tax rate to 25 per cent from 30 per cent for companies with annual turnover of ₹250 crore ($36.3 million) or less.

Following election promises, the government could present a plan for investing up to ₹100 lakh crore ($1.45 trillion) on highways, railways and ports while budgeting another ₹25 lakh crore for increasing farm productivity over five years, BJP officials said.

To meet the funds required for all that, Sitharaman may need to increase February’s 3.4 per cent target for fiscal deficit to gross domestic product to 3.6 per cent, said a senior government official.

A Reuters poll showed economists expected a 3.5 per cent target .

Sitharaman is also likely to seek a higher dividend from the central bank, draw up plans to raise funds from a 5G telecom auction and propose more privatisation, sources said.

After becoming prime minister in 2014, Modi improved public finances, trimming the fiscal deficit to 3.4 per cent from 4.5 per cent in 2013-14, mostly through cuts in subsidies and higher retail taxes on fuel.

However, he is now under pressure to loosen the purse strings to meet election promises and jack up the growth rate.

Falling rural demand

“A large part of the economy is facing a recession with a fall in rural demand and private investments,” said Ashwani Mahajan, chief of the economic wing of the Rashtriya Swayamsevak Sangh, the ideological parent of Modi’s ruling group.

“It is the right time to expand the fiscal deficit up to 4 per cent of GDP,” he said adding the budget could provide tax incentives for food processing, logistics and small businesses as well as affordable housing.

Private investment in India rose an annual 7.2 per cent in January-March, down from 8.4 per cent the previous quarter. Capital investment growth slowed to 3.6 per cent from 10.6 per cent.

Economists expect spending to rise as the government plans to expand cash benefits to farmers and inject more funds into state-run banks – saddled with nearly $150 billion stressed assets – to support lending.

Modi has set an ambitious target of turning India into a $5 trillion in the next five years from $2.7 trillion, which will require an annual growth rate of over 10 per cent, economists said.

But that will require a big second wave of reforms that Modi shied from during his first term, economists say. To unlock potential and growth more robustly, in their view, India needs to make land acquisition easier and amend labour laws that make hiring and firing of workers difficult.

BJP’s Agarwal says the budget speech “will lay a roadmap of economic reforms for the next five years, with an objective of boosting economic growth.”

अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनी गुरुवार से दो दिवसीय पाकिस्तान दौरे पर

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति का पाकिस्तान दौरा दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि गनी तब इस दौरे पर जा रहे हैं जब अमेरिका और तालिबान के बीच सातवें चरण की शांति वार्ता शनिवार को प्रस्तावित है.

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो अफगानिस्तान के राष्ट्रपति दो दिवसीय पाकिस्तान दौरे के लिए गुरुवार को अपने देश से रवाना होंगे. पाकिस्तान की दुनिया न्यूज के मुताबिक, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और अन्य उच्चस्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. गनी शुक्रवार को लाहौर स्थित मुगल कालीन बादशाही मस्जिद जाएगें और नमाज पढ़कर इबादत करेंगे.

बता दें कि इस दौरे कि योजना तब बनी थी, जब सऊदी अरब में आयोजित हुए इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की बैठक के दौरान गनी और खान की मुलाकात हुई थी. इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और अफगान शांति प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी.

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति का पाकिस्तान दौरा दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि गनी तब इस दौरे पर जा रहे हैं जब अमेरिका और तालिबान के बीच सातवें चरण की शांति वार्ता शनिवार को प्रस्तावित है. फिलहाल वार्ता स्थल की जानकारी नहीं है.

लोकसभा में कांग्रेस की मांग, अभिनंदन की मूंछों को ‘राष्ट्रीय मूंछें’ घोषित करे मोदी सरकार

लोकसभा में कांग्रेस सदन के नेता अधीर रंजन चौधरी ने अपने भाषण के दौरान मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान जब वह विदेशनीति पर बोले तो उन्होंने एयरस्ट्राइक का भी जिक्र किया.

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने एक अनोखी मांग रखी है. बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान में घुसकर उनके विमान को गिराने वाले वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को उन्होंने पुरस्कार देने की मांग की है. इतना ही नहीं, कांग्रेस नेता ने कहा है कि अभिनंदन की मूंछों को ‘राष्ट्रीय मूंछें’ घोषित कर देनी चाहिए.

लोकसभा में कांग्रेस सदन के नेता अधीर रंजन चौधरी ने अपने भाषण के दौरान मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान जब वह विदेशनीति पर बोले तो उन्होंने एयरस्ट्राइक का भी जिक्र किया.

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ANI@ANI

Congress Lok Sabha leader, Adhir Ranjan Chowdhury in Lok Sabha: Wing Commander Abhinandan Varthaman should be awarded and his moustache should be made ‘national moustache’. (file pic of Abhinandan Varthaman)8372:55 PM – Jun 24, 2019334 people are talking about thisTwitter Ads info and privacy

अधीर रंजन ने कहा कि बालाकोट में जो वायुसेना ने एयरस्ट्राइक की, कांग्रेस पार्टी उसका समर्थन करती है. इसके साथ ही उन्होंने मांग रखी कि विंग कमांडर अभिनंदन को पुरस्कार से नवाजा जाना चाहिए और उनकी मूंछों को राष्ट्रीय मूंछें घोषित कर देनी चाहिए.

कांग्रेस नेता ने कहा कि हम चाहते हैं हमारे नौजवान इससे प्रेरित हों. अधीर रंजन चौधरी की इस मांग पर लोकसभा में जमकर तालियां बजीं.

घर में घुसकर पाकिस्तान को सिखाया था सबक

गौरतलब है कि 14 फरवरी को जब पाकिस्तानी आतंकवादियों ने पुलवामा में आतंकी हमला किया था, तो उसके बाद वायुसेना ने बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी. एयरस्ट्राइक के अगले ही दिन पाकिस्तान ने भी पलटवार किया था, जिसके जवाब में विंग कमांडर अभिनंदन उनके विमान का पीछा करते वक्त पाकिस्तानी सीमा में जा गिरे थे.

अभिनंदन को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ बना लिया था और वह करीब 2 दिन तक वहां पर ही रहे थे. हालांकि, भारतीय कूटनीति के दबाव में पाकिस्तान को उन्हें छोड़ना ही पड़ा. भारत में उनके सम्मान में लोगों ने मार्च निकाला, सोशल मीडिया पर उनके लिए कैंपेन चला. अभिनंदन भारत वापसी के बाद कुछ दिन छुट्टी पर रहे, लेकिन बाद में उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन कर ली.

अभिनंदन का झटका नहीं भूल पाया पाकिस्तान!

इस घटना के इतने दिन बाद भी पाकिस्तान अभिनंदन के खौफ से उभर नहीं पाया है. पहले तो जब उन्होंने पाकिस्तान में घुसकर उनके विमान को गिराया तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया. एक वीडियो जारी करवा उनसे पाकिस्तानी सेना की तारीफ करवाई गई. अभी हाल ही में वर्ल्डकप में भारत-पाकिस्तान के मैच से पहले अभिनंदन को लेकर एक विज्ञापन बनाया गया, जिसमें उनका मजाक उड़ाया गया.

LIC में 8581 पदों पर भर्ती, ब‍िना देर क‍िए करें आवेदन

अगर आप भी सरकारी नौकरी (Govt. Jobs) की तलाश कर रहे हैं तो ये खबर खास आपके लिए ही है। टाइम्स नाउ हिंदी (Times Now Hindi) स्टूडेंट्स के लिए लेकर आया है सरकारी नौकरियों से जुड़ी जानकारी। अगर आप सरकारी नौकरी के लिए आवेदन दे रहे हैं तो यहां आपको मिलेगी इससे जुड़ी हर नई अपडेट। आइए एक नजर डालते हैं पुलिस भर्ती, रेलवे भर्ती, बैंक नौकरी, शिक्षक भर्ती से संबंधित हर जानकारी।

बेसिल, हरियाणा एसएससी और डाक विभाग ने कुल 9235 वैकेंसी निकाली है। इसके लिए आवश्यक योग्यता 8वीं से लेकर 12वीं पास तक चाहिए। बेसिल में 8वीं पास और आईटीआई डिप्लोमा वालों के लिए 1100 पद पर मौका है। HSSC ने पुलिस विभाग में भर्ती के लिए 6400 पोस्ट पर आवेदन निकाला है। पोस्टल डिपार्टमेंट में डाक सेवक के 1735 पद खाली हैं। 

नेशनल कोल फील्ड में वैकेंसी: नेशनल कोल फील्‍ड लिमिटेड में ट्रेड अप्रेंटिस के 2484 पदों पर आवेदन मांगे  हैं। इसके लिए 8वीं पास और आईटीआई धारक उम्‍मीदवार आवेदन कर सकते हैं। 16 से 24 उम्र के कैंडिडेट्स आधिकारिक वेबसाइट nclcil.in पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 10 जुलाई है।

एयर इंडिया में सीधी भर्ती:  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन एयर इंडिया लिमिटेड में ऑपरेशन एजेंट के 97 पदों पर भर्ती हो रही है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 24 जून, 2019 है। कैंडिडेट्स का सिलेक्शन डायरेक्ट इंटरव्यू के जरिए होगा। 35 साल तक के कैंडिडेट्स इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं।

NIT Karnataka Recruitment 2019: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कर्नाटक NITK ने 67 एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर भर्ती निकाली है। अगर आप इस नौकरी के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो इसके लिए अंतिम तिथि 24 जून, 2019 है। अधिसूचना को आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं। 

LIC Recruitment 2019: भारतीय जीवन बीमा निगम में अपरेंटिस डेवलपमेंट ऑफिसर के 8581 पद खाली हैं जिसके लिये आवेदन मांगे जा रहे हैं। पदों के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष निर्धारित की गई है।

ओडिशा कर्मचारी चयन आयोग ने लेखा परीक्षक के कई पदों पर आवेदन मांगे हैं। पदों की संख्या 82 है। कई पदों पर आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 11 जूलाई, 2019 है। आवेदन के लिए उम्मीदवारों की आयु 21 से 32 वर्ष पदों के अनुसार निर्धारित की गई है।

RRB Paramedical Recruitment 2019: रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (आरआरबी) ने पैरामेडिकल स्टाफ की कुल 1937 रिक्त पदों की भर्ती का एप्लीकेशन स्टेट्स लिंक एक्टिव कर दिया है।

Delhi Police Recruitment 2019 (दिल्ली पुलिस) के तहत कॉन्स्टेबल के पदों पर भर्ती निकली है। इच्‍छुक युवा दिल्‍ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के ल‍िए मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से 12वीं पास होना चाहिए। उम्र 18 वर्ष से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए। 

EPFO में सहायक पद पर नियुक्ति: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कमर्चारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में सहायक के पदों पर आवेदन मांगवाए हैं। कुल 280 पदों पर भर्ती होनी है। इस परीक्षा के लिये लिखित परीक्षा ली जाएगी। यह परीक्षा दो चरणों में होगी। चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतनमान के अनुसार 44,900 रुपए सैलरी दी जाएगी।

ITBP Recruitment 2019 (भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल ITBP) के तहत कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) के पदों पर भर्ती होनी है। खाली पदों की संख्‍या 121 है। न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम आयु 23 वर्ष की बीच की आयु के युवा आवेदन कर सकते हैं। चयन पीएसटी के साथ मेडिकल टेस्ट के आधार पर होगा। उम्मीदवार वेबसाइट http://www.recruitment.itbpolice.nic.in के पर जाकर ऑनलाइन आवेदन 21 जून तक कर सकते हैं। 

पश्चिम बंगाल सरकार राज्य सरकार ने ग्रेजुएट छात्रों के लिए वैकेंसी निकाली है। पद के लिये उम्मीदवार 1 जुलाई 2019 तक अप्लाई कर सकते हैं। वेतनमान की बात करें तो जॉब करने वालों को 7100 से 37600 रुपये तक दिये जाएंगे। अधिक जानकारी के लिये pscwbonline.gov.in लिंक पर क्‍लिक करें। 

MDL Recruitment (मझगांव डॉक लिमिटेड) के तहत बंपर भर्ती हो रही है। इन पदों में व्यक्तिगत सहायक सह क्लर्क, जूनियर हिंदी अनुवादक और सुरक्षा सिपाही के पद शामिल हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 26 जून निर्धारित की गई है। एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी के आवेदकों को कोई शुल्क नहीं देना है जबकि सामान्य, ओबीसी श्रेणी के आवेदकों को 100 रुपये देने होंगे। 

RRB Recruitment 2019: उत्तर रेलवे में कई पदों पर वैकेंसी: रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड ने नार्दन रेलवे में कई पदों पर वैकेंसी निकाली है। बोर्ड ने इसके लिये नोटिफिकेशन भी जारी कर दिये हैं। यहां कंसल्टेंट सीनियर रेसिडेंट से लेकर क्लर्क तक के पदों पर भारी भर्ती की जानी है। जॉब से जुड़ी जानकारी के लिये आधिकारिक वेबसाइट nr.indianrailways.gov.in पर जाकर चेक कर सकते हैं। 

DRDO Recruitment 2019 : रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने तकनीशियन ‘ए’ के कुल 351 पदों पर आवेदन मांगे हैं। आवेदन जमा करने की शुरुआती डेट 03 जून है जबकि आवेदन जमा करने की लास्‍ट डेट 26 जून, 2019 है। आवेदकों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता कक्षा 10वीं उत्तीर्ण के साथ अन्य डिग्री/डिप्लोमा होनी चाहिये। जो कि पदों के अनुसार अलग-अलग निर्धारित हो सकती है। 

BRO Recruitment 2019 (सीमा सड़क संगठन) के तहत चालक मेकैनिकल परिवहन, इलेक्ट्रीशियन और अन्य के 778 पदों पर नौकरी निकाली गई है। आवेदन के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। आवेदन करने की अंतिम तिथि 16 जुलाई 2019 है। 

BECIL Recruitment 2019 (ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड BECIL) के तहत 278 तकनीकी स्टाफ और गैर-तकनीकी स्‍टाफ के पदों पर भर्ती होनी है। आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून, 2019 है। आवेदन के लिए न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम 50 वर्ष होनी चाहिए। शुल्‍क के रूप में सामान्य/ ओबीसी वर्ग के लिए 500 रूपये देने होंगे जबकि एससी/एसटी/पीएच वर्ग के लिए 250 रूपये देने होंगे। 

CPCB यानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) के 26 पदों पर आवेदन निकाले गए हैं। इन पदों पर आवेदकों का चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। आवेदन के ल‍िए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 28 वर्ष निर्धारित की गई है।

राघव चड्ढा का बीजेपी पर बड़ा आरोप- ‘EVM मशीन बदलने के लिए EXIT पोल में जीत की हवा’

साउथ दिल्ली से ‘आप’ उम्मीदवार राघव चड्ढा ने एक्ज़िट पोल के उलट जीत का दावा किया है. राघव चड्ढा ने कहा, पिछले कई चुनाव में एग्ज़िट पोल के उलट परिणाम आए हैं.

लोकसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद आए एग्ज़िट पोल से विपक्ष में अफरा तफरी देखने को मिल रही है. ऐसा ही कुछ आम आदमी पार्टी में भी देखने को मिल रहा है. साउथ दिल्ली से ‘आप’ उम्मीदवार राघव चड्ढा ने एक्ज़िट पोल के उलट जीत का दावा किया है.

राघव चड्ढा ने कहा, पिछले कई चुनाव में एग्ज़िट पोल के उलट परिणाम आए हैं. हालांकि जीत के दावे के बीच राघव ने भाजपा पर एक बड़ा आरोप लगाया है. ‘आजतक’ से बातचीत के दौरान एग्ज़िट पोल सवाल खड़े करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि “बीजेपी 1998 से अबतक हर Exit पोल जीतते आई है, लेकिन कई चुनाव हारी है.”

“भाजपा के मतदाता को हमेशा ज्यादा और आम आदमी पार्टी के मतदाता को कम आंका जाता है. 2013 में 6 सीटें बताईं लेकिन आईं 28, 2014 लोकसभा में शून्य सीटें बताईं लेकिन आईं 4 सीटें, 2015 विधानसभा में 25 सीट बताईं लेकिन 70 में से 67 सीट आईं.”

राघव ने आगे बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, “2019 में वोट डालने के बाद मतदाता से पूछा जाता है तो मतदाता घबरा जाता है, इस घबराहट में मतदाता बीजेपी को वोट देने की बात कहता है लेकिन वो बीजेपी को वोट देता नहीं है, ये डर बीजेपी सरकार ने मतदाता के दिमाग मे डाल दिया है.”

दिल्ली के एग्जिट पोल में हार नज़र आने के सवाल पर राघव चड्ढा ने 23 मई का इंतज़ार करने की बात कही. राघव ने कहा, “अभी नतीजों का इंतजार करना चाहिए, हर राजनीतिक दल का एक आकलन होता है कि कहां से वोट आए, कहां गए. मेरा मानना है कि 23 मई को रिजल्ट आने के बाद एग्ज़िट पोल को चुल्लू भर पानी में डूबना पड़ेगा. हम 11 महीने ज़मीन पर रहे हैं, दिल्ली में कई आंकड़े गलत साबित होंगे, तन मन धन से काम किया है और जमीन पर रिश्ते बनाए हैं.”

हालांकि बातचीत के अंत में राघव EVM पर सवाल खड़े करना नहीं भूले. उन्होंने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा, “ममता बनर्जी ने गंभीर बात कही है कि Exit पोल में भाजपा की ज्यादा सीट दिखाकर एक हवा बना दी जाए और पीछे से EVM मशीन बदल दी जाए और जब नतीजे आएं तो कोई EVM पर सवाल न खड़ा कर सके. EVM मशीन बदलने के लिए, EXIT पोल को आधार बनाया गया है. चुनाव जीतने के लिए बीजेपी हर गैर कानूनी काम कर रही है, चाहे मशीन से छेड़छाड़ हो या मशीन बदलना हो.”

आपको बता दें कि दिल्ली में 12 मई को लोकसभा चुनाव हुए थे. इसके बाद 19 मई को अंतिम चरण का चुनाव ख़त्म होने के बाद सामने आए एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी दिल्ली की सातों सीटों पर काफी पीछे नज़र आ रही है. हालांकि बीजेपी जहां एग्जिट पोल से खुश है तो वहीं, विपक्षी दल एग्जिट पोल को गलत ठहराते हुए 23 मई का इंतज़ार कर रहे हैं.

ग्लोबल वॉर्मिंग को ख़त्म करने का मास्टर प्लान


कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे रिसर्च केंद्र की योजना बनाई है जहां इस पृथ्वी को बचाने के नए रास्ते तलाशे जा सकें.
इस रिसर्च में ऐसे तरीकों की खोज की जाएगी जिससे ध्रुवों की पिघल रही बर्फ को फिर से जमाया जा सके और वातावरण से कार्बन डाई ऑक्साइड निकाली जा सके.
इस केंद्र को इस लिए बनाया जा रहा है क्योंकि वर्तमान समय में पृथ्वी पर ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए उठाए जा रहे क़दम नाकाफ़ी लग रहे हैं.
यह पहल ब्रितानी सरकार के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर सर डेविड किंग की ओर से कराई जा रही है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, ”आने वाले 10 सालों में हम जो भी करेंगे वह मानव जाति के अगले दस हज़ार सालों का भविष्य तय करेगा. इस दुनिया में ऐसा कोई भी एक केंद्र नहीं है दो इस बेहद महत्वपूर्ण विषय पर फ़ोकस हो.”
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के जलवायु वैज्ञानिक डॉक्टर एमिली शुकबर्ग ने कहा, ”नए सेंटर का मिशन जलवायु समस्या को हल करना होना चाहिए और हम उस पर विफ़ल नहीं हो सकते.”
सेंटर फॉर क्लाइमेट रिपेयर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के कार्बन न्यूट्रल फ्यूचर्स इनिशिएटिव का हिस्सा है, जिसका नेतृत्व डॉक्टर शुकबर्ग कर रही हैं.
ये मुहिम सामाजिक वैज्ञानिकों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को एक साथ लाएगी.
डॉक्टर शुकबर्ग ने बीबीसी को बताया, “यह वास्तव में हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है, और हम जानते हैं कि हमें अपने सभी कोशिशों के साथ इसका जवाब देने की आवश्यकता है.”
ध्रुवों की बर्फ़ दोबारा जमाना
ध्रुवों पर बर्फ़ को जमाने की कोशिशों में सबसे कारगर कदमों में से एक होगा इनके ऊपर पड़ने वाले बादलों को “चमकदार” करना है.
इसके लिए बेहद पतली नली के माध्यम से बिना मानव रहित जहाजों पर लगाया जाएगा और समुद्री पानी को को पंप से खींचा जाएगा.
इससे नमक के कण नली में आएंगे. इन नमक को बादलों तक पहुंचाया जाएगा. इससे बादल गर्मी को और भी ज़्यादा रिफ़्लेक्ट कर सकेंगे.
CO2 को रिसाइकल करना
जलवायु परिवर्तन से निपटने का एक और अहम तरीका है ‘ कार्बन कैप्चर और स्टोरेज’ जिसे सीसीएस कहते हैं.